उज्जैन में गुरुद्वारा गुरु सिंघ सभा के अध्यक्ष पद का विवाद अकाल तख्त अमृतसर पहुंचा
गांधी का कहना है कि पूरा समाज मेरे साथ हैं। साधारण सभा ने मुझे निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया है। बैठक में मनजीत भी मौजूद थे, तब उन्होंने विरो …और पढ़ें

HighLights
- मनजीत सिंघ डंग का आरोप छल कपट से अध्यक्ष बने इकबाल सिंह गांधी
- गांधी बोले – समाज मेरे साथ, साधारण सभा में मुझे निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया
- इकबाल सिंह गांधी श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश को मानने को तैयार नहीं हैं
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। दूधतलाई स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंघ सभा के अध्यक्ष पद का विवाद सिख समाज की प्रमुख संस्था अकाल तख्त अमृतसर पहुंच गया है। समाज के मनजीत सिंघ डंग ने अध्यक्ष इकबाल सिंह गांधी पर छलकपट से पद हथियाने का आरोप लगाया है।
मामले में गांधी का कहना है कि पूरा समाज मेरे साथ हैं। साधारण सभा ने मुझे निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया है। बैठक में मनजीत भी मौजूद थे, उस समय उन्होंने निर्णय का विरोध क्यों नहीं किया।
बताया जाता है द्वारा गुरुसिंघ सभा एक रजिस्टर्ड संस्था है। वर्ष 2025 में संस्था के दो वर्षीय चुनाव होना थे। उस समय समाज के दो गुटों के उम्मीदवार खड़े हुए थे लेकिन समाज के कुछ वरिष्ठजनों ने हस्तक्षेप कर दोनों गुट को समझाइश दी तथा एक-एक वर्ष के लिए दोनों के अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया।
बताया जाता है इसके बाद इकबाल सिंह गांधी को वर्ष 2025-26 के लिए (एक वर्ष) अध्यक्ष घोषित किया गया। समझौते के अनुसार वर्ष 2026 में एक वर्ष के लिए दूसरे गुट का अध्यक्ष बनना था, लेकिन इकबालसिंह गांधी ने साधारण सभा बुला ली और पुन: निर्विरोध अध्यक्ष बनकर बैठ गए। शुरुआत में इस निर्णय का अंदरखाने में खूब विरोध हुआ। वंचित गुट का कहना था कि जब पहले ही एक-एक वर्ष के लिए दोनों गुट के प्रमुखों को अध्यक्ष बनाने का निर्णय हो चुका है, तो फिर साधारण सभा क्यों बुलाई गई।
समाज में प्रभावशाली लोगों ने दबाया विरोध
बताया जाता है समाज के कुछ प्रभावशाली लोगों ने विरोध के स्वर को दबाने का प्रयास किया। इसके बाद मनजीत सिंंघ डंग मामलों को सिख धर्म की प्रमुख संस्था श्री अकाल तख्त साहिब में लेकर गए, वहां से इकबाल सिंह गांधी के चुनाव को अयोग्य घोषित कर दिया गया और नए अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
अकाल तख्त से नहीं, फर्म एडं सोसायटी से चलती है संस्था
इकबाल सिंह गांधी श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश को मानने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि गुरुसिंघ सभा गुरुद्वारे की कमेटी अकाल तख्त से नहीं उज्जैन फर्म एंड सोसायटी के नियम से चलती है। संस्था की साधारण सभा में बायलाज के अनुसार चुनाव संपन्न कराए हैं। उसी के अनुसार में अध्यक्ष बना हूं, इसलिए हटने का सवाल ही पैदा नहीं होता है।