उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के 100 से अधिक गेस्ट और विजिटिंग फैकल्टी का आमंत्रण आज समाप्त, नया आदेश जारी नहीं


सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की अध्ययनशालाओं में कार्यरत 100 से अधिक गेस्ट और विजिटिंग फैकल्टी का आमंत्रण 30 जून को स्वतः समाप्त हो जाएगा। जिसके …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 30 Jun 2026 10:03:22 AM (IST)Updated Date: Tue, 30 Jun 2026 10:03:22 AM (IST)

उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के 100 से अधिक गेस्ट और विजिटिंग फैकल्टी का आमंत्रण आज समाप्त, नया आदेश जारी नहीं
विक्रम विवि में गैस्ट फैकल्टी का अनुबंध होगा समाप्त। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. कई अध्ययनशालाएं अतिथि विद्वानों के भरोसे ही चल रही, नए सत्र की शुरुआत से पहले बनी ऐसी स्थिति
  2. अध्ययनशालाओं में 75 से अधिक अतिथि विद्वान, लगभग 60 विजिटिंग विद्वान और 2 अंशकालीन विद्वान कार्यरत हैं
  3. कुलसचिव ने 11 जून को आदेश जारी किया था कि 30 जून को शैक्षणिक सत्र 2025-26 समाप्त हो रहा है

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की अध्ययनशालाओं में कार्यरत 100 से अधिक गेस्ट और विजिटिंग फैकल्टी का आमंत्रण 30 जून को स्वतः समाप्त हो जाएगा। जिसके आदेश विश्वविद्यालय प्रशासन ने ही जारी किए हैं। लेकिन इन्हें निरंतर करने के संबंध में अब तक नया आदेश जारी नहीं किया गया है।

30 जून की शाम तक नया आदेश जारी नहीं होता है तो नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत पर 1 जुलाई से ही विवि में शैक्षणिक अराजकता की स्थिति बन सकती है। क्योंकि कई अध्ययनशालाएं अतिथि विद्वानों के भरोसे ही चल रही हैं।

विश्वविद्यालय की विभिन्न अध्ययनशालाओं में 75 से अधिक अतिथि विद्वान, लगभग 60 विजिटिंग विद्वान और 2 अंशकालीन विद्वान कार्यरत हैं। इनमें स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी संस्थान (एसओईटी), कृषि, पर्यावरण प्रबंधन, दर्शन शास्त्र, संस्कृत-वेद एवं ज्योतिषविज्ञान, इतिहास सहित कुछ अन्य अध्ययनशालाएं ऐसी हैं, जो अतिथि विद्वानों के भरोसे संचालित हो रही हैं। इन अध्ययनशालाओं में केवल एक नियमित प्रोफेसर के पास प्रभार है, बाकी कार्य अतिथि विद्वान ही करते हैं।

इधर कुलसचिव ने 11 जून को आदेश जारी किया था कि 30 जून को शैक्षणिक सत्र 2025-26 समाप्त हो रहा है। 1 जुलाई से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होना है। लेकिन विवि प्रशासन ने इस संबंध में कोई नया आदेश जारी नहीं किया है, न ही भर्ती के लिए कोई विज्ञापन जारी किया है। खास बात यह है कि न्यायालय के आदेश के अनुसार अतिथि विद्वान को अन्य अतिथि विद्वान से रिप्लेस नहीं किया जा सकता। केवल नियमित-स्थायी भर्ती से ही अतिथि विद्वानों को रिप्लेस किया जा सकता है।

कक्षा संचालन और अन्य कार्यों पर असर पड़ेगा

कई अध्ययनशालाएं अतिथि विद्वानों द्वारा ही संचालित की जा रही हैं। नया आदेश नहीं आने पर इन अध्ययनशालाओं में 1 जुलाई से नियमित कक्षाओं का संचालन नहीं हो सकेगा।

  • विश्वविद्यालय में चल रही प्रवेश की प्रक्रिया भी प्रभावित होगी। क्योंकि कैरियर मार्गदर्शन देने के लिए अध्ययनशालाओं में कोई नहीं मिलेगा।
  • विद्यार्थियों को दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के लिए भी भटकना पड़ेगा।
  • अध्ययनशाला में अकादमिक के अलावा गैर शिक्षकीय कार्य भी प्रभावित होंगे।
  • रिजल्ट और मूल्यांकन का कार्य भी प्रभावित होगा।

मई का मानदेय प्राप्त नहीं हुआ

विवि की विभिन्न अध्ययनशालाओं में मई माह में परीक्षाओं का संचालन, मूल्यांकन और एडमिशन संबंधी प्रक्रिया के अंतर्गत अतिथि विद्वानों द्वारा कार्य किया गया। इसके बावजूद मई माह के मानदेय का भुगतान अतिथि विद्वानों को अब तक नहीं हो पाया है। जबकि जून माह भी समाप्त होने वाला है। ऑडिट विभाग की आपत्ति के कारण सभी अतिथि विद्वानों का मानदेय भुगतान नहीं हो पाया है। अतिथि विद्वानों की मानें तो प्रत्येक माह ऑडिट की आपत्ति के कारण उनके मानदेय की फाइलें अटकती हैं।

कमेटी की अनुशंसा पर कार्रवाई

इस संबंध में एक कमेटी गठित की गई है। कमेटी की जो भी अनुशंसा आएगी, उसके अनुसार नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी। अतिथि विद्वानों के मई माह के वेतन की स्थिति को भी ऑडिट में स्पष्ट कर दिया है। जल्द ही उनका मानदेय उन्हें प्राप्त हो जाएगा। –डॉ. अनिल कुमार शर्मा, कुलसचिव

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