उज्जैन में सिंहस्थ के लिए नौ भव्य प्रवेश द्वार बनाने को दो बार ठेकेदार मिले नहीं, अब 13 मैदान में


नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करने वाले नौ भव्य प्रवेश द्वारों का रास्ता अब खुलता नजर आ रहा है। दो बार निविदा बेनतीजा रहने के बाद तीसरी कोशिश में 13 ठेकेदारों ने रुचि दिखाई है। उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) को मिले प्रस्तावों का तकनीकी मूल्यांकन चल रहा है।

अगले माह नवरात्र के आसपास ठेकेदार तय कर निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। परियोजना करीब 92 करोड़ 25 लाख रुपये की है, जिसके तहत शहर के अलग-अलग मार्गों पर नौ प्रवेश द्वार बनाए जाने हैं। ये द्वार सिंहस्थ-2028 में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उज्जैन की पहचान और स्वागत का प्रतीक बनेंगे।

तीन पैकेज, नौ द्वार और 18 माह की समय-सीमा

यूडीए ने अधिक से अधिक निर्माण एजेंसियों को आकर्षित करने के लिए पूरी परियोजना को तीन पैकेज में बांटा है। पहले पैकेज में त्रिशूल द्वार, विक्रमादित्य द्वार और डमरू द्वार, दूसरे में अमृत द्वार, पंचजन्य द्वार और गज द्वार, जबकि तीसरे पैकेज में कालगणना द्वार, उज्जैनी द्वार और सिंहस्थ द्वार का निर्माण प्रस्तावित है।

तीनों पैकेज पर कुल 92.25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कार्यादेश जारी होने के बाद निर्माण पूरा करने के लिए 18 माह की समय-सीमा तय की गई है। यानी ठेकेदार तय होने के बाद समय पर काम शुरू करना और निर्धारित अवधि में पूरा करना यूडीए के सामने बड़ी चुनौती होगी।

फरवरी से चल रही ठेकेदारों की तलाश

नौ प्रवेश द्वारों के निर्माण के लिए पहली बार फरवरी 2026 में निविदा जारी की गई थी। पर्याप्त प्रतिस्पर्धा नहीं मिलने से ठेका आवंटित नहीं हो सका। दूसरी बार भी कोशिश बेनतीजा रही। इसके बाद 25 जुलाई को तीसरी बार निविदा जारी की गई।

अब तय अधिसूचना अनुसार निविदाएं खोल ली गई है और प्राप्त 13 ठेकेदारों के प्रस्तावों का तकनीकी मूल्यांकन शुरू कर दिया गया है। इसमें निर्धारित पात्रता और तकनीकी शर्तों की जांच होगी। इसके बाद ठेका आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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पत्थरों की नक्काशी से लेकर पांच साल के रखरखाव तक जिम्मेदारी

प्रवेश द्वारों को भव्य स्वरूप देने के लिए बंसी पहाड़पुर और जैसलमेर के पत्थरों पर कलात्मक नक्काशी प्रस्तावित है। निर्माण एजेंसियों को 18 माह में काम पूरा करने के साथ पांच वर्ष तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

निर्माण सामग्री और श्रम लागत में वृद्धि, तकनीकी शर्तें और भुगतान की शर्तें पहले ठेकेदारों की बेरुखी की वजह मानी जा रही थीं। सिंहस्थ की तैयारियों में अब सवाल यह नहीं कि प्रवेश द्वार बनेंगे या नहीं, बल्कि यह है कि वे समय पर तैयार होकर श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए खड़े हो पाएंगे या नहीं।



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