समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन में प्रदेश में पहले पायदान पर उज्जैन, 198 केंद्रों पर 97 हजार किसानों ने बेची उपज


अब तक 198 केंद्रों पर 7.84 लाख टन गेहूं का उपार्जन हो चुका है। इस दौरान 97 हजार किसानों ने 2600 रुपये क्विंटल के भाव में गेहूं बिक्री किया। …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 27 May 2026 11:26:25 AM (IST)Updated Date: Wed, 27 May 2026 11:26:25 AM (IST)

समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन में प्रदेश में पहले पायदान पर उज्जैन, 198 केंद्रों पर 97 हजार किसानों ने बेची उपज
सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदा गेहूं। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. गत वर्ष से एक लाख टन अधिक हुआ उपार्जन
  2. 2000 किसान गेहूं बेचने से वंचित रह गए
  3. 8 लाख टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य होगा पूरा

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के मामले में उज्जैन जिला पहले पायदान पर रहा। 10 अप्रैल से उपार्जन की शुरुआत की गई। अब तक 198 केंद्रों पर 7.84 लाख टन गेहूं का उपार्जन हो चुका है। इस दौरान 97 हजार किसानों ने 2600 रुपये क्विंटल के भाव में गेहूं बिक्री किया। गत वर्ष के अपेक्षा इस साल एक लाख टन गेहूं अधिक उपार्जन किया गया। उपार्जन की अंतिम तारीख 28 मई तय की गई है।

इस वर्ष जिले में बंपर गेहूं का उत्पादन बताया जा रहा था। जिसके चलते किसान गेहूं उपार्जन को लेकर संशय की स्थिति में थे। क्योंकि सरकार ने 10 अप्रैल तक उपार्जन शुरू नहीं किया था। ऐसे में जरूरतमंद किसानों ने हजारों क्विंटल गेहूं मंडी नीलामी में समर्थन मूल्य से करीब 200 से 300 रुपये क्विंटल कम भाव में बेच दिया था।

कुछ उपार्जन केंद्र पर तो किसानों ने आंदोलन तक किया

हालांकि 10 अप्रैल से जिले में 198 उपार्जन केंद्र स्थापित कर सरकार ने पंजीकृत किसानों से उनके गेहूं का उपार्जन शुरू कर दिया था, जो 28 मई तक जारी रहेगा। इस दौरान किसानों को कई बार गेहूं बिक्री हेतु स्लाट बुक करने में कभी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ उपार्जन केंद्र पर तो किसानों ने आंदोलन तक किया।

कुछ सरकारी समितियों में बारदाना को लेकर भी संकट गहराया, जिसका नतीजा किसानों को भुगतना पड़ा। समर्थन मूल्य का भाव 2600 रु. क्विंटल होने से किसानों का रुझान गेहूं बिक्री के मामले में मंडी नीलामी की बजाय उपार्जन केंद्र पर अधिक रहा। यही कारण है कि 48 दिन की समय अवधि में जिले में गेहूं उपार्जन का आंकड़ा 8 लाख टन के करीब पहुंचने वाला है।

किसानों को 1700 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है

अब तक 7.84 लाख टन उपार्जन हो चुका है। बता दें गत वर्ष गेहूं उपार्जन 6.75 लाख टन पर ही अटक गया था। गत वर्ष 75 हजार किसानों ने ही उपार्जन केंद्र पर गेहूं बिक्री किया था। जिला खाद्य नियंत्रक शालू वर्मा ने बताया कि उपार्जित गेहूं का 96 फीसद का परिवहन हो चुका है। किसानों के खाते में 1700 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। जिन किसानों के स्लाट 23 मई तक बुक हो चुके हैं, उनका गेहूं उपार्जन 28 मई तक जारी रहेगा। बताया जा रहा है कि स्लाट बुक करने के चक्कर में करीब 2 हजार पंजीकृत किसान गेहूं बिक्री से वंचित रह गए हैं।

कृषि मंडी में अभी भी गेहूं के भाव सरकारी भाव से कम

इधर कृषि उपज मंडी में गेहूं के सीजन में शुरुआत दिनों में तो आवक 20 से 25 हजार बोरी तक पहुंची थी। लेकिन समर्थन मूल्य की खरीदी शुरू होने के बाद 10 से 12 हजार बोरी रोजाना की हो रही है। क्वालिटी कमजोर होने के कारण नीलामी में किसानों को अभी भी गेहूं के भाव सरकारी भाव से कम मिल रहे हैं। बीते तीन माह में मंडी नीलामी में करीब 8 लाख टन गेहूं बिक्री हेतु आया। किसानों को अधिकांश गेहूं के भाव 2200 से 2500 रु. क्विंटल मिले। चमक वाला गेहूं 3200 रुपये क्विंटल तक बिका। वर्तमान में गज्जर, मीडियम तथा पोषक गेहूं की आवक अधिक हो रही है। चमक वाला पूर्णा तथा लोकवन गेहूं काफी काम आ रहा है।

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