उज्जैन के चरक अस्पताल में 40 मिनट ब्लैक आउट, मोबाइल टार्च की रोशनी में किया मरीज का उपचार


चरक अस्पताल प्रबंधन व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर नहीं है। सोमवार शाम करीब पौने सात बजे अस्पताल की बिजली गुल हो गई थी। जिसके बाद जनरेटर से भी सप्लाय बहाल न …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 12 May 2026 10:28:50 AM (IST)Updated Date: Tue, 12 May 2026 10:28:50 AM (IST)

उज्जैन के चरक अस्पताल में 40 मिनट ब्लैक आउट, मोबाइल टार्च की रोशनी में किया मरीज का उपचार
इमरजेंसी कक्ष में मोबाइल टार्च की रोशनी में मरीज का उपचार करते अस्पतालकर्मी। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. मरीज व उनके स्वजन के साथ डाक्टर व स्वास्थकर्मी हुए परेशान
  2. जनरेटर चालू नहीं होने के कारण हुए परेशानी
  3. 40 मिनट तक जनरेट चालू नहीं हो सका था

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। संभाग का सबसे बडा चरक अस्पताल बदहाली झेल रहा है। लापरवाही का आलम यह है कि सोमवार शाम को अस्पताल की बिजली गुल हो गई थी। 40 मिनट तक जनरेट चालू नहीं हो सका था, जिससे अस्पताल में ब्लैक आउट की स्थिति बन गई।

अंधेरे में मोबाइल टार्च की रोशनी में मरीजों का उपचार किया गया। इससे डाक्टर, स्वास्थ्यकर्मी व मरीज खासे परेशान हुए। इधर सिविल सर्जन का कहना है कि मात्र दस मिनट ही बिजली गुल हुई थी।

जनरेटर से भी सप्लाय बहाल नहीं हो सकी थी

चरक अस्पताल प्रबंधन व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर नहीं है। सोमवार शाम करीब पौने सात बजे अस्पताल की बिजली गुल हो गई थी। जिसके बाद जनरेटर से भी सप्लाय बहाल नहीं हो सकी थी। इस कारण अस्पताल में अंधेरा छा गया था। अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष, वार्डों में मोबाइल टार्च की रोशनी में मरीजों का उपचार किया गया था।

40 मिनट बाद बहाल हुई सप्लाय

अंधेरा होने के कारण मरीज व उनके स्वजन के अलावा डाक्टर व कर्मचारी भी परेशान हो गए थे। बताया जा रहा है कि 40 मिनट बाद बिजली सप्लाय बहाल होने के बाद सभी ने राहत की सांस ली। हालांकि इस संबंध में सिविल सर्जन डा. संगीता पल्सानिया का कहना है कि मात्र 10 मिनट ही बिजली गुल हुई थी। फिर जनरेटर से सप्लाय बहाल हो गई। बता दें कि पूर्व में भी कई बार अस्पताल की बिजली गुल हो चुकी है। मगर अस्पताल प्रबंधन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने 38 क्लीनिकों व अस्पतालों की जांच, 30 अपंजीकृत मिले

उज्जैन। मंछामन कालोनी स्थित जनसेवा नोबल पाली क्लीनिक में बच्ची की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद खुली है। सीएमएचओ ने जिले के सभी अस्पतालों व क्लीनिक की जांच के आदेश जारी किए थे। सोमवार को दिनभर चार टीमों ने 38 अस्पतालों व क्लीनिकों की जांच की थी। इसमें चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। 38 में से मात्र आठ ही पंजीकृत अस्पताल व क्लीनिक मिले हैं, जबकि 30 अपंजीकृत मिले हैं।

सभी संचालकों को दस्तावेजों के साथ आवेदन कर पंजीकरण करवाने के निर्देश दिए गए है। दस्तावेज नहीं होने पर सील करने की कार्रवाई की जाएगी। मंछामन कालोनी स्थित जनसेवा नोबल पाली क्लीनिक में शनिवार को एक बालिका की आपरेशन के दौरान मौत हो गई थी। जांच में सामने आया था कि क्लीनिक पंजीकृत नहीं था। जिसके बाद डा. अशोक पटेल ने जिले के समस्त ब्लाक मेडिकल आफिसर एवं मेडिकल आफिसरों को निर्देश जारी किए थे कि वह अपने-अपने क्षेत्र में सतत निरीक्षण कर अवैधानिक रूप से संचालित अपंजीकृत क्लीनिक एवं अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।

शहर में क्षेत्र में जांच के लिए पांच जांच दलों का गठन किया गया था। सोमवार को चार टीमों ने शहरी क्षेत्र के 38 अस्पतालों व क्लीनिक की जांच की थी। जिसमें सामने आया कि मात्र 8 अस्पताल व क्लीनिक ही पंजीकृत है। जबकि 30 अपंजीकृत पाए गए हैं। सभी संचालकों को जल्द ही नियमानुसार दस्तावेजों के साथ सीएमएचओ कार्यालय में आवेदन कर पंजीकरण करवाने के आदेश जारी किए गए है।जिले में 87 रजिस्टर्ड अस्पताल व क्लीनिक सीएमएचओ डा. पटेल ने बताया कि बालिका की मौत के बाद जारी आदेश के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। जिले में वर्तमान में मात्र 87 अस्पताल व क्लीनिक रजिस्टर्ड है। जबकि बगैर रजिस्टर्ड संचालित होने वाले अस्पताल व क्लीनिकों की संख्या कहीं अधिक है। जांच में इनकी संख्या स्पष्ट हो जाएगी। जिसके बाद सख्त अभियान चलाया जाएगा।

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