उज्जैन में वेडिंग डेस्टिनेशन बना भगवान चिंतामन गणेश का मंदिर, मात्र 3200 रुपये में हो रहे विवाह


मंदिर में मात्र 3200 रुपये में वैदिक रीति रिवाज से विवाह कराए जा रहे हैं। देशभर के युवा फिजूलखर्ची से दूर चिंतामन गणेश के आंगन में सनातन धर्म परंपरा स …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 10 May 2026 10:00:07 AM (IST)Updated Date: Sun, 10 May 2026 10:00:07 AM (IST)

उज्जैन में वेडिंग डेस्टिनेशन बना भगवान चिंतामन गणेश का मंदिर, मात्र 3200 रुपये में हो रहे विवाह
चिंतामन गणेश मंदिर परिसर में आयोजित विवाह समारोह। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. फिजूलखर्ची से दूर सनातन धर्म परंपरा से विवाह बंधन में बंध रहे देशभर के युगल
  2. इस वर्ष अब तक 570 युवक-युवती परिवार के साथ सादगी से कर चुके हैं विवाह
  3. दूरदराज से युवक-युवती यहां परिवार के साथ आकर सनातन हिन्दू धर्म परंपरा से विवाह कर रहे हैं

राजेश वर्मा, नईदुनिया, उज्जैन। प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर अब आस्था के साथ- साथ किफायती वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में लोकप्रिय हो रहा है। मंदिर परिसर में मात्र 3200 रुपये शुल्क में वैदिक रीति रिवाज से विवाह संपन्न कराए जा रहे हैं। देशभर के युवा फिजूलखर्ची से दूर चिंतामन गणेश के आंगन में सनातन धर्म परंपरा से विवाह बंधन में बंध रहे हैं। इस वर्ष अब तक 570 युवक-युवति यहां परिवार आयोजन में सादगी से विवाह कर चुके हैं।

मध्य प्रदेश का हृदय स्थल उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल, शक्तिपीठ हरसिद्धि, मोक्षदायिनी शिप्रा तथा सिंहस्थ नगरी के रूप में तो अपनी विशिष्ट पहचान रखता ही है, लेकिन अब यह शहर देशभर के युवाओं में वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी प्रसिद्ध हो रहा है। दूरदराज से युवक-युवती यहां अपने परिवार के साथ आकर चिंतामन गणेश के आंगन में सनातन हिन्दू धर्म परंपरा से विवाह कर रहे हैं। लोगों का मानना है विघ्नहर्ता भगवान गणेश की साक्षी में संपन्न विवाह जीवन को सुख समृद्धि और मंगलमय बनाता है। साथ ही धार्मिक वातावरण में काफी कम खर्च में यहां विवाह संपन्न हो जाता है।

3200 रुपये में विवाह की साम्रगी और पंडित भी

चिंतामन गणेश मंदिर में मात्र 3200 रुपये में विवाह संपन्न कराया जाता है। इस राशि में विवाह सामग्री तथा विवाह कराने वाले पंडित की दक्षिणा शामिल है। संपूर्ण आयोजन मंदिर समिति की निगरानी में होता है। उक्त राशि की बाकायदा रसीद भी दी जाती है। मंदिर में विवाह के लिए शेड बना हुआ है। वर, वधू के परिवार के लिए बैठने आदि की संपूर्ण व्यवस्था है। जिन युवक-युवतियों का यहां विवाह होता है, उन्हें विवाह का प्रमाण पत्र भी दिया जाता है।

आधार कार्ड व दसवीं की मार्कशीट अनिवार्य

मंदिर प्रबंधक अभिषेक शर्मा ने बताया चिंतामन गणेश मंदिर में विवाह के लिए वर, वधु का वयस्क होना अनिवार्य है। उसके बाद माता पिता की सहमति होना भी जरूरी है। इसके बाद युवक-युवती के आधार कार्ड व दसवीं की मार्कशीट ली जाती है। आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध होने के बाद विवाह के लिए निर्धारित 3200 रुपये की शासकीय रसीद काटी जाती है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद विवाह संपन्न कराया जाता है।

पिछले साल 503 विवाह हुए

प्रबंधक शर्मा ने बताया वर्ष 2025 में 31 दिसंबर तक मंदिर में कुल 503 शादियां हुई थीं। इस वर्ष 2026 में 8 मई तक 570 शादियां हो चुकी है। अभी साल खत्म होने में सात माह बाकी हैं। इस साल सादगी से होने वाली शादियां नया रिकार्ड बना सकती हैं।

भगवान राम, लक्ष्मण, सीता ने की थी स्थापना

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चिंतामन गणेश मंदिर में भगवान गणेश की संयुक्त मूर्तियां विराजित हैं। मान्यता है वनवास के दौरान प्रभु श्री राम सीता व लक्ष्मणजी के साथ तीर्थपुरी अवंतिका आए थे। यहां उन्होंने षड् विनायक की स्थापना की थी। चिंतामन गणेश मंदिर उन्हीं छह गणेश में से एक है। मान्यता है यहां भगवान राम, सीता व लक्ष्मण ने यहां क्रमश:चिंतामन, इच्छामन तथा सिद्धिविनायक की स्थापना की थी। भगवान गणेश की यह तीनों मूर्तियां मंदिर के गर्भगृह में संयुक्त विराजित दिखाई देती है।

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