देश और धर्म की रक्षा करने में सेना सक्षम, अखाडों की परंपरा समाप्त करें, अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने पीएम को लिखा लेटर


सनातन धर्म में ऋषि, मुनि परंपरा रही है ना कि अखाड़ों की परंपरा, शंकराचार्य ने जब अखाड़ों की स्थापना की थी उस समय देश की परिस्थितयां अलग थी। …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 28 Mar 2026 02:00:06 PM (IST)Updated Date: Sat, 28 Mar 2026 02:07:13 PM (IST)

देश और धर्म की रक्षा करने में सेना सक्षम, अखाडों की परंपरा समाप्त करें, अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने पीएम को लिखा लेटर
अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं.महेश पुजारी।

HighLights

  1. आए दिन साधु संतों के बीच विवाद के मामले सार्वजनिक हो रहे हैं
  2. अखाड़े जप, तप, अनुष्ठान की बजाय व्यवसायिक केंद्र बन चुके हैं
  3. साधु समाज ऐश्वर्य की ज़िंदगी व्यतीत कर पद और प्रतिष्ठा के लिए लड़ रहा है

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सनातन हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए आद्य शंकराचार्य ने ढाई हजार साल पहले अखाड़ों की स्थापना की थी। तब से लेकर आज तक तेरह अखाड़े अस्तित्व में है, जिन्हें धर्म की सेना कहा जाता है। हालांकि साधु संत अब धर्म से विलग होकर पद,प्रतिष्ठा व ऐश्वर्य की अंधी दौड़ में लग गए हैं। वैसे भी देश व धर्म की रक्षा के लिए भारतीय सेनाएं हैं, ऐसे में अखाड़ों की परंपरा को समाप्त कर दिया जाना चाहिए।

अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं.महेश पुजारी ने यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में कही है। आगे लिखा हमारे सनातन धर्म में ऋषि, मुनि परंपरा रही है ना कि अखाड़ों की परंपरा। शंकराचार्य ने जब अखाड़ों की स्थापना की थी उस समय देश की परिस्थितयां अलग थी। वर्तमान में देश, धर्म एवं सनातन की रक्षा के लिए भारतीय सेना है ही।

पद के लिए हो रही लड़ाई

वर्तमान में अखाड़े जप, तप, अनुष्ठान की बजाय व्यवसायिक केंद्र बन चुके हैं और साधु समाज ऐश्वर्य की ज़िंदगी व्यतीत कर पद और प्रतिष्ठा के लिए लड़ रहा है। आए दिन साधु संतों के बीच विवाद के मामले सार्वजनिक हो रहे हैं।

यदि साधु समाज आपस में पद, प्रतिष्ठा,संपत्ति के लिए लड़ेंगे तो सनातन धर्म की रक्षा कौन करेगा। साधु संतों ने धर्म मार्ग छोड़ दिया यह देखकर आम हिन्दू धर्मावलंबी व्यथित है, इसलिए अब अखाड़ों की परंपरा को समाप्त कर देना चाहिए।



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