महाकाल के मस्तक पर तीन रंगों के कमल से हुआ शृंगार, गणतंत्र दिवस पर मंदिर तिरंगे के रंग में सजा


गणतंत्र दिवस की सुबह उज्जैन का महाकाल मंदिर तिरंग के रंग में रंग गया। भस्म आरती में बाबा महाकाल के मस्तक पर तीन रंगों के कमल से शृंगार किया गया। मंदिर …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 26 Jan 2026 09:16:18 AM (IST)Updated Date: Mon, 26 Jan 2026 09:26:14 AM (IST)

महाकाल के मस्तक पर तीन रंगों के कमल से हुआ शृंगार, गणतंत्र दिवस पर मंदिर तिरंगे के रंग में सजा
उज्जैन में महाकाल मंदिर और भगवान महाकाल के मस्तक पर तीन रंगों का कमल।

HighLights

  1. तीन दिन की छुट्टियों में बड़ी संख्या में भगवान के दर्शन करने पहुंच रहे भक्त
  2. महाकाल मंदिर में तीन रंगों से विद्युत सज्जा की गई है
  3. बाबा महाकाल की भक्ति के साथ राष्ट्र भक्ति से सराबोर हो रहे भक्त

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में गणतंत्र दिवस के दिन सुबह हुई भस्म आरती में तीन रंगों के कमल से महाकाल के मस्तक पर शृंगार किया गया। पूरा मंदिर तिरंग के रंग में रंगा हुआ है। मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन को पहुंचने वाले भक्त यहां राष्ट्र भक्ति से भी सराबोर हो रहे हैं। भक्त जय श्री महाकाल के साथ भारत माता की जय के जयकारे लगा रहे हैं।

बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु

उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन के साथ अन्य मंदिरों में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। शनिवार, रविवार के साथ आज सोमवार को आज गणतंत्र दिवस पर छुट्टी होने की वजह से देश के कई राज्यों से यहां पर्यटक पहुंचे हैं। महाकाल मंदिर के साथ, हरसिद्धि मंदिर, काल भैरव मंदिर, गढ़ कालिका मंदिर और मंगलनाथ मंदिर सहित महाकाल लोक में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना जारी है।

हजारों की भीड़ संभालने के लिए सात जवान और कुछ गार्ड

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जनवरी के आखिरी सप्ताहांत ने महाकाल व कालभैरव मंदिर में व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। भारी भीड़ के कारण दोनों मंदिरों की व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। कालभैरव मंदिर में भीड़ नियंत्रण के इंतजाम नहीं थे। महाकाल मंदिर में गार्ड व्यवस्था नहीं संभाल पाए। सामान्य दर्शनार्थियों को घंटों में भगवान महाकाल के दर्शन हुए।

स्थिति बिगड़ते देख मंदिर प्रशासन को फ्री फार आल के आधार पर दर्शन व्यवस्था लागू करना पड़ी। कालभैरव मंदिर की व्यवस्था बद से बदत्तर होती जा रही है। यहां की स्थित देखकर लगता है इस शहर में प्रशासन नाम की कोई चीज ही नहीं है। नतीजतन शनिवार, रविवार व सोमवार को गणतंत्र दिवस होने के बावजूद मंदिर में भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। हजारों लोगों की भीड़ संभालने के लिए पांच सात जवान तथा कुछ गार्ड थे।



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