महाअष्टमी पर उज्जैन में नगर पूजा शुरू, DM ने लगाया माता महामाया व महालया को मदिरा का भोग


करीब 27 किलो मीटर लंबे नगर पूजा मार्ग पर मदिरा की धार लगाई गई। साथ ही पूड़ी, भजिए, गेहूं व चने की घुघरी अर्पित किए गए। मान्यता है ऐसा करने से नगर में मौजूद अतृप्त आत्माएं तृप्त होती हैं तथा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती है।

Publish Date: Tue, 30 Sep 2025 05:18:39 AM (IST)

Updated Date: Tue, 30 Sep 2025 09:11:42 AM (IST)

महाअष्टमी पर उज्जैन में नगर पूजा शुरू, DM ने लगाया माता महामाया व महालया को मदिरा का भोग
महाअष्टमी पर उज्जैन में अनोखी नगर पूजा

HighLights

  1. शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर मंगलवार को सुख-समृद्धि के लिए नगर पूजा होगी
  2. माता महामाया व महालया को मदिरा का भोग लगाकर पूजा की शुरुआत करेंगे

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर मंगलवार को सुख-समृद्धि के लिए नगर पूजा होगी। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह सुबह 7.30 बजे चौबीस खंभा स्थित माता महामाया व महालया को मदिरा का भोग लगाकर पूजा की शुरुआत करेंगे। इसके बाद शासकीय अधिकारी व कोटवारों का दल शहर के विभिन्न कोणों में स्थित 40 से अधिक देवी व भैरव मंदिर में ढोल ढमाकों के साथ रवाना होंगे।

करीब 27 किलो मीटर लंबे नगर पूजा मार्ग पर मदिरा की धार लगाई गई। साथ ही पूड़ी, भजिए, गेहूं व चने की घुघरी अर्पित किए गए। मान्यता है ऐसा करने से नगर में मौजूद अतृप्त आत्माएं तृप्त होती हैं तथा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती है।

धर्मधानी उज्जैन में नगर पूजा की परंपरा सम्राट विक्रमादित्य के काल से चली आ रही है। कालांतर में राजा महाराजा इस परंपरा का निर्वहन करते आए हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सरकार की ओर से नगर पूजा कराई जाती है। नगर पूजा का शुभारंभ चौबीस खंभा माता मंदिर से होता है।

मान्यता है कि यह प्राचीन उज्जैन का मुख्य द्वार है। इस द्वार के दोनों ओर माता महामाया व महालया विराजित है। सर्वप्रथम इन्हीं की पूजा होती है, इसके बाद शहर के अन्य देवी व भैरव मंदिरों में पूजा की जाती है।

मान्यता है कि देवी भैरव आदि अनादिकाल से इस नगर की सुरक्षा कर रहे हैं। उन्हीं के आशीर्वाद से प्रजाजन सुखी व संपन्न रहते हैं। देवताओं की कृपा सदा सर्वदा बनी रहे, इसलिए प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर राजा द्वारा देवी भैरव के पूजन की परंपरा है।

12 घंटे चलता है नगर पूजा का सिलसिला

सुबह चौबीस खंभा माता मंदिर से सुबह नगर पूजा की शुरुआत होती है। सुबह से शाम तक करीब 12 घंटे पूजा अर्चना का सिलसिला चलता है। रात 8 बजे गढ़कालिका माता मंदिर के समीप हांडी फोड़ भैरव मंदिर में पूजा अर्चना के साथ नगर पूजा संपन्न होती है।

इसे भी पढ़ें- भोपाल के पुलिस स्टेशन में ही सुरक्षित नहीं महिला, शिकायत लेकर पहुंची महिला का टीआई ने छीना मोबाइल, जानें पूरा मामला

शक्तिपीठ हरसिद्धि में दोपहर 12 बजे पूजा

शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर में महाअष्टमी पर दोपहर 12 बजे शासकीय पूजा हुई। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह व एसपी प्रदीप शर्मा माता हरसिद्धि की पूजा अर्चना करेंगे। देवी को सौभाग्य सामग्री अर्पित की जाएगी। पुजारी रामचंद्र गिरि ने बताया हरसिद्धि मंदिर में शाक्त पूजा होती है। यहां देवी को मदिरा अथवा तामसिक वस्तु अर्पित नहीं की जाती है। इसलिए महाअष्टमी पर कलेक्टर दोपहर में अलग से आकर पूजा अर्चना करते हैं।

गढ़कालिका में शाम से भंडारा, रात में महाआरती

शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर मंगलवार को सिद्धपीठ गढ़ कालिका माता मंदिर में शाम 7 बजे से रात 11.30 बजे तक महाभंडारा हुआ। इसके बाद रात 12 बजे ढोल ढमाकों के साथ महाआरती की जाएगी। शासकीय पुजारी महंत करिश्मानाथ ने बताया भक्तों से महाप्रसादी व महाआरती में शामिल होने का अनुरोध किया है। दशहरे के दिन भी महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *