मकर संक्रांति पर तिल के उबटन से स्नान करेंगे महाकाल, तिल के पकवानों का भोग लगेगा


पंचांग की गणना के अनुसार 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 8 मिनट पर सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 09 Jan 2026 01:48:13 PM (IST)Updated Date: Fri, 09 Jan 2026 01:54:33 PM (IST)

मकर संक्रांति पर तिल के उबटन से स्नान करेंगे महाकाल, तिल के पकवानों का भोग लगेगा
महाकाल ज्योतिर्लिंग। फाइल फोटो

HighLights

  1. उज्जैन में शाम को श्री महाकाल महालोक में गूंजेगा शिवोह्म का नाद
  2. संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी होने से इसका महत्व बढ़ गया
  3. दान पुण्य के साथ यह व्रत के लिए भी सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है संक्रांति

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सूर्य के उत्तरायन का पर्व मकर संक्रांति 14 जनवरी बुधवार को षटतिला एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि व अमृतसिद्धि योग के महासंयोग में मनाया जाएगा। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में तड़के 4 बजे भस्म आरती में तिल उत्सव मनेगा। भगवान को तिल के उबटन से स्नान कराया जाएगा। पश्चात तिल के पकवानों का महाभोग लगाकर आरती की जाएगी। शाम को श्री महाकाल महालोक में मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव के हाथों श्री महाकाल महोत्सव का शुभारंभ होगा। शिवोह्म के नाद से राज का आंगन गुंजायमान होगा।

पंचांग की गणना के अनुसार 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 8 मिनट पर सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही दान, पुण्य का सिलसिला शुरू हो जाएगा। धर्मशास्त्र की मान्यता के अनुसार सूर्य के उत्तरायन होने के बाद स्नान, दान का पुण्य पर्व 15 जनवरी को रहेगा। इस बार मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी होने से इसका महत्व और बढ़ गया है।

दान पुण्य के साथ यह व्रत के लिए भी सर्वश्रेष्ठ मानी जा रही है। सांदीपनि आश्रम, गोपाल मंदिर सहित अन्य कृष्ण मंदिरों में इस दिन विशेष उत्सव रहेगा। भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम में इस दिन भगवान का तिल मिश्रित जल से अभिषेक पूजन किया जाएगा। पश्चात तिल के पकवानों का महाभोग लगाकर आरती की जाएगी।

खिचड़ी का दान कर सकेंगे, ग्रहण नहीं करेंगे

प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर भक्तवृंद व्रत रखते हैं। इस दिन अन्न का त्याग बताया गया है। विशेषकर चावल का सेवन बिल्कुल नहीं किया जाता है। दिनभर में एक समय फलहार के बाद अगले दिन पारणा होता है। संक्रांति पर षटतिला एकादशी का संयोग होने से श्रद्धालुओं में चावल की खिचड़ी के सेवन व दान को लेकर भ्रम की स्थिति बन रही है। लेकिन विद्वानों का मत है कि मकर संक्रांति पर चावल का दान करने में कोई रोक नहीं है, इसके सेवन से बचना चाहिए।



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