नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। उज्जैन जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) में मचे घमासान ने अब प्रदेश स्तर पर हलचल मचा दी है। 22 जनवरी को कांग्रेस द्वारा लगाए गए चुन-चुनकर नाम काटने के आरोपों के ठीक 8 दिन बाद, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने भोपाल से सख्त फरमान जारी किया है।
इस आदेश ने उज्जैन प्रशासन को उन शिकायतों पर कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर दिया है, जिन्हें विधायक महेश परमार ने कलेक्टर के समक्ष प्रमुखता से उठाया था।
कांग्रेस विधायक ने गंभीर आरोप लगाए थे
मालूम हो कि 10 दिन पहले 22 जनवरी को तराना विधायक एवं जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेश परमार और पूर्व विधायक दिलीप सिंह गुर्जर ने कलेक्टर रौशन कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपकर गंभीर आरोप लगाए थे। विधायक का दावा था कि सत्ताधारी दल के दबाव में बीएलओ के जरिए कांग्रेस विचारधारा वाले वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं।
फर्जी हस्ताक्षर और एक जैसे प्रिंटेड ‘प्रारूप-7’ (नाम हटाने हेतु आवेदन) का उपयोग कर वैध मतदाताओं को सूची से बाहर करने की कोशिश की जा रही है।
महिदपुर के एक युवक लखन शर्मा ने शपथ पत्र देकर यह स्वीकार किया था कि भाजपा कार्यकर्ताओं के कहने पर उसने अनजाने में कई मतदाताओं के नाम हटाने की आपत्ति दर्ज कराई थी, जो बाद में जांच में वैध पाए गए।
भोपाल से जारी हुआ ‘एक्शन’ लेटर
कांग्रेस की इन शिकायतों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच, 30 जनवरी को उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजय कुमार श्रीवास्तव ने उज्जैन सहित सभी कलेक्टरों को पत्र (क्रमांक 674) जारी किया है।
पत्र में स्पष्ट स्वीकार किया गया है कि अनाधिकृत व्यक्ति अत्यधिक संख्या में ‘फार्म-7’ प्रस्तुत कर रहे हैं। इनका उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम सूची से विलोपित कराना है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि ऐसी शिकायतों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए।
संदिग्ध फार्म-7 की मौके पर जाकर होगी जांच
उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने साफ कर दिया है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहेगी। कांग्रेस की ‘स्पॉट वेरिफिकेशन’ की मांग और भोपाल के निर्देशों के बाद अब प्रशासन हर संदिग्ध फार्म-7 की मौके पर जाकर जांच करेगा।
यदि कोई मतदाता अपने पते पर सही पाया गया और उसका नाम गलत तरीके से हटाने की कोशिश हुई, तो संबंधित बीएलओ और आपत्तिकर्ता पर कानूनी गाज गिरना तय है।
सियासी गलियारों में चर्चा
इस पत्र की प्रतिलिपि पूर्व विधायक दिलीप सिंह गुर्जर और कांग्रेस कमेटी को भी भेजी गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भोपाल से आए इस पत्र ने उन अधिकारियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के हाथ बांध दिए हैं, जो मतदाता सूची में हेरफेर करने की फिराक में थे।