धर्म, दर्शन और कालगणना की प्राचीन नगरी उज्जैन में अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष महाधिवेशन आज से


नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। धर्म, दर्शन और कालगणना की प्राचीन नगरी उज्जैन एक बार फिर वैश्विक बौद्धिक विमर्श का केंद्र बनने जा रही है। 21 और 22 दिसंबर को यहां छठवें अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष महाधिवेशन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें भारत सहित नेपाल के प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य, वास्तुविद, शोधकर्ता और आध्यात्मिक चिंतक सहभागिता करेंगे।

आयोजन कालिदास अकादमी के कोठी रोड स्थित अभिरंग सभागार में होगा। आयोजन समिति के संयोजक डॉ. सर्वेश्वर शर्मा एवं सह संयोजक डॉ. अजय शर्मा ने बताया कि महाधिवेशन का उद्घाटन रविवार दोपहर 2.30 बजे किया जाएगा।

संयुक्त तत्वावधान में आयोजित

अतिथि राज्यसभा सदस्य उमेशनाथ महाराज और सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद के वरिष्ठ सदस्य राजेशसिंह कुशवाह रहेंगे। अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज करेंगे। यह महाधिवेशन सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, कालिदास संस्कृत अकादमी, पूर्णश्री फाउंडेशन, आचार्य वराहमिहिर न्यास, सम्राट विक्रमादित्य विद्वत परिषद् तथा साउथ एशियन एस्ट्रो फेडरेशन (नेपाल) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

इन राज्यों और देश के विद्वानों की सहभागिता होगी

यह संयोग भारतीय ज्ञान परंपरा को अकादमिक और अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन में गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों के प्रख्यात विद्वान अपने शोधपरक व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे।

विशेष आकर्षण नेपाल पंचांग समिति के कार्यकारी निदेशक आचार्य लक्ष्मण पंथी, डॉ. निलिम्प त्रिपाठी और आचार्य कैलाशपति नायक जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वानों की सहभागिता होगी, जो पंचांग, ज्योतिषीय गणना और समय-निर्धारण की वैज्ञानिक परंपराओं पर मार्गदर्शन देंगे।

दो दिवसीय होगा यह सत्र

दो दिवसीय कार्ययोजना के अनुसार पहले दिन उद्घाटन सत्र के पश्चात दो अकादमिक व्याख्यान सत्र आयोजित होंगे, जिनमें ज्योतिष, वास्तु, तंत्र और अध्यात्म के समन्वित दृष्टिकोण पर चर्चा होगी।

दूसरे दिन 22 दिसंबर को प्रातः 10 बजे से लगातार चार सत्र होंगे, जिनमें ज्योतिष के वैश्विक महत्व, आधुनिक संदर्भों में इसकी उपयोगिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर केंद्रित विमर्श होगा। समापन समारोह सोमवार शाम 4 बजे आयोजित किया जाएगा, जिसमें सहभागी विद्वानों का सम्मान किया जाएगा।

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उज्जैन के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा आयोजन

आयोजन समिति का मानना है कि यह महाधिवेशन न केवल उज्जैन की प्राचीन ज्योतिषीय परंपरा को अंतरराष्ट्रीय पहचान देगा, बल्कि भारतीय ज्ञान-विज्ञान को समकालीन वैश्विक संवाद से जोड़ने में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा। यह सम्मेलन उज्जैन को एक बार फिर विश्व पटल पर काल, गणना और दर्शन की राजधानी के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।



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