केंद्र के फैसले के बाद सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन में एयरपोर्ट ‘मिशन मोड’ में
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। केंद्र सरकार के 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने के फैसले के बाद महाकाल की नगरी उज्जैन में एयरपोर्ट प्रोजेक्ट ने मिशन मोड पकड़ लिया है। सिंहस्थ-2028 से पहले इसे चालू करने की रणनीति के साथ अब प्रशासनिक, राजनीतिक और आर्थिक हलचल तेज हो गई है।
मालूम हो कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में ‘उड़े देश का आम नागरिक (उड़ान)’ योजना के तहत 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने के निर्णय ने उज्जैन को बड़ी सौगात दी है। इस फैसले के तुरंत बाद दताना एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को लेकर राज्य स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। अब फोकस साफ है- सिंहस्थ से पहले हर हाल में एयरपोर्ट चालू करना।
15 करोड़ श्रद्धालु पहुंचने का अनुमान
उज्जैन, जहां ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, वहां महाकुंभ सिंहस्थ-2028 के दौरान यह संख्या 15 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए एयरपोर्ट को ‘ट्रैफिक मैनेजमेंट टूल’ के रूप में देखा जा रहा है।
अब तक सड़क और रेल नेटवर्क पर अत्यधिक दबाव रहता है, लेकिन एयरपोर्ट बनने से यात्रियों का बड़ा हिस्सा सीधे हवाई मार्ग से पहुंचेगा, जिससे शहर और आसपास की सड़कों पर ट्रैफिक लोड कम होगा। प्रशासनिक स्तर पर टेंडर प्रक्रिया की तैयारी शुरू हो चुकी है।
दताना में करीब 240 एकड़ जमीन पर एयरपोर्ट विकसित किया जाना है, जहां शुरुआती चरण में एटीआर-72 जैसे विमानों के संचालन की योजना है। वर्तमान 900 मीटर रनवे को बढ़ाकर 1800 मीटर करने का प्रस्ताव है, जिससे भविष्य में बड़े विमान और नाइट लैंडिंग भी संभव हो सकेगी। इस परियोजना के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये का प्रस्ताव केंद्र को भेजा जा चुका है।
चार महीने पहले एएआई के साथ हुआ था एमओयू
मध्यप्रदेश सरकार और एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया (एएआई) के बीच नवंबर 2025 में एमओयू साइन होने के बाद अब समन्वय और तकनीकी प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने इसे प्राथमिकता प्रोजेक्ट घोषित किया है, जिससे राजनीतिक स्तर पर भी इसकी मानिटरिंग बढ़ गई है। आर्थिक दृष्टि से यह प्रोजेक्ट उज्जैन के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है।
एयरपोर्ट बनने से पर्यटन, होटल इंडस्ट्री, ट्रांसपोर्ट और लाजिस्टिक्स सेक्टर में निवेश बढ़ेगा। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सिंहस्थ-2028 के संदर्भ में एयरपोर्ट की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
यह न केवल श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि आपदा प्रबंधन, मेडिकल इमरजेंसी और वीआईपी मूवमेंट के लिए भी त्वरित सुविधा प्रदान करेगा। कुल मिलाकर, केंद्र के फैसले के बाद उज्जैन एयरपोर्ट अब केवल एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि भीड़ प्रबंधन, कनेक्टिविटी और आर्थिक विस्तार का रणनीतिक केंद्र बनकर उभर रहा है, जो सिंहस्थ-2028 की सफलता की आधारशिला साबित हो सकता है।
संचालन की कमान निजी कंपनी को सौंपने की कवायद
प्रस्तावित उज्जैन एयरपोर्ट का संचालन निजी कंपनी के हाथ में दिए जाने की कवायद है, ताकि प्रबंधन अधिक कुशल, तेज और तकनीक आधारित हो सके। निजी भागीदारी से इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से निवेश, बेहतर यात्री सुविधाएं और समयबद्ध संचालन सुनिश्चित होता है।
साथ ही सरकार पर वित्तीय बोझ कम होता है और जोखिम का बंटवारा होता है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) माडल के जरिए एयरपोर्ट को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनाते हुए सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर फोकस किया जा सकता है।