उज्जैन में सिंहस्थ क्षेत्र में अवैध मठ-आश्रमों पर कार्रवाई से हड़कंप, अब रसूखदारों की बारी


नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सिंहस्थ मेला क्षेत्र में एक दिन पहले बुधवार को अवैध मठ-आश्रमों पर हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद अन्य अवैध स्ट्रक्चर के मालिकों में हड़कंप मच गया है। सारे रसूखदार अपना निर्माण टूटने से बचाने को एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। प्रशासन के बाद अभी भी 175 अवैध स्ट्रक्चर की लोकेशन है। सबको अपने हाथों अवैध निर्माण हटा लेने का नोटिस दिया जा चुका है। इंतजार, अब कार्रवाई का है।

मालूम हो कि एक दिन पहले नगर निगम अमले ने पुलिस- प्रशासन का सहयोग लेकर नृसिंहघाट से लालपुल के मध्य शंकराचार्य मठ स्वामी पुण्यानंदगरी, श्री माधवानंद आश्रम सहित पांच प्रमुख धार्मिक एवं सामाजिक स्थलों के अवैध हिस्सों को जमींदोज कर दिया था। इस कार्रवाई के बाद से चिह्नित किए गए शेष अवैध स्ट्रक्चर मालिकों में हड़कंप मचा हुआ है।

180 अवैध निर्माणों की लिस्ट तैयार

प्रशासनिक सर्वे में सिंहस्थ क्षेत्र में कुल 180 अवैध निर्माणों की सूची तैयार की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले दो दशकों में इस क्षेत्र में ‘धार्मिक स्थल’ की आड़ में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं। मैरिज गार्डन, होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पीछे मंदिर, आश्रम का निर्माण कर उन्हें ‘सुरक्षा कवच’ देने की कोशिश की गई है।

बुधवार की कार्रवाई के बाद, अब शेष अतिक्रमणकारी अपने राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव का इस्तेमाल कर बुलडोजर रुकवाने की जुगत में लग गए हैं। हालांकि, कलेक्टर कार्यालय से स्पष्ट संकेत हैं कि नोटिस की अवधि समाप्त होते ही शेष निर्माणों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।

प्रशासनिक सख्ती और भविष्य की चुनौती

प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती उन निर्माणों को हटाना है जो वर्षों से जड़ें जमा चुके हैं। बुधवार को हुई कार्रवाई महज एक ‘ट्रेलर’ मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सिंहस्थ मेला क्षेत्र की पवित्रता और व्यवस्था बनाए रखने के लिए भूमि का खाली होना अनिवार्य है। यदि अतिक्रमणकारी स्वयं निर्माण नहीं हटाते हैं, तो प्रशासन बलपूर्वक इन्हें हटाएगा।

जानकारों का कहना है कि यदि आज इन ‘स्थायी’ अतिक्रमणों को नहीं हटाया गया, तो 2028 में विश्व के इस सबसे बड़े समागम के दौरान बड़ी अव्यवस्था और जनहानि का खतरा पैदा हो सकता है। प्रशासन की वर्तमान सख्ती उज्जैन के सुरक्षित भविष्य के लिए अपरिहार्य है।

जिम्मेदारी में चूक और सरकारी खजाने पर बोझ

सिंहस्थ क्षेत्र में पक्का निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित होने के बावजूद सैकड़ों अवैध संरचनाएं खड़ी हो गईं। यह संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है। जब निर्माण शुरू हुआ, तब जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंद लीं, जिसका परिणाम अब ‘बुलडोजर कार्रवाई’ के रूप में सामने है। नियमों के मुताबिक, अवैध निर्माण हटाने में आने वाला खर्च (मशीनरी, लेबर, डीजल) संबंधित अतिक्रमणकारी से वसूला जाना चाहिए।

लेकिन विडंबना यह है कि अब तक के रिकॉर्ड में ऐसी कोई वसूली दर्ज नहीं है। सरकारी मशीनरी और धन का दुरुपयोग कर अतिक्रमण हटाया जाता है, जिसका बोझ अंततः राजकोष और आम जनता पर पड़ता है। प्रशासन को अब ‘हटाने के खर्च’ की वसूली के लिए कठोर वित्तीय कुर्की जैसे कदम उठाने की आवश्यकता है।

क्यों अनिवार्य है सिंहस्थ भूमि का संरक्षण

बढ़ता जनसैलाब : सिंहस्थ-2028 कोई सामान्य आयोजन नहीं है। वर्ष 2016 में जहां 7 करोड़ श्रद्धालु आए थे, वहीं 2028 में यह आंकड़ा 15 करोड़ पार करने का अनुमान है। 1980 (612 हेक्टेयर) से लेकर 2016 (3061 हेक्टेयर) तक मेला क्षेत्र का दायरा लगातार बढ़ा है। इस बार इससे भी अधिक भूमि की दरकार होगी।

आवश्यकता : साधु-संतों के पांडाल: अखाड़ों और खालसों की संख्या बढ़ रही है, जिन्हें बड़े क्षेत्रफल की आवश्यकता होती है।

सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन : भीड़ नियंत्रण के लिए ‘होल्डिंग एरिया’ और आपातकालीन निकासी रास्तों के लिए खाली मैदान अनिवार्य हैं।

बुनियादी ढांचा : अस्थायी अस्पताल, पुलिस चौकियां, बिजली ग्रिड और विशाल पार्किंग के लिए एक-एक इंच जमीन की कीमत है।

यह भी पढ़ें : मध्य प्रदेश में रातें भी हुईं गर्म, खरगोन-खंडवा में पारा 35 डिग्री सेल्सियस के पार



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *