उज्जैन में श्वानों के लिए बनेंगे आधुनिक आश्रय स्थल, भोजन-नसबंदी-रेबीज नियंत्रण की होगी व्यवस्था


नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। उज्जैन शहर में निराश्रित श्वानों की बढ़ती संख्या, नागरिकों की सुरक्षा और पशु कल्याण को ध्यान में रखते हुए नगर निगम द्वारा बड़ा कदम उठाने जा रहा है। महापौर मुकेश टटवाल ने बताया कि उज्जैन शहर में श्वानों के लिए नए और आधुनिक आश्रय स्थल बनाए जाएंगे। इन आश्रय स्थलों में श्वानों के सुरक्षित रहने, नियमित भोजन, नसबंदी (एबीसी), रेबीज टीकाकरण और प्राथमिक उपचार की समुचित व्यवस्था की जाएगी। इस योजना के लिए शीघ्र ही विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार होगी।

महापौर ने क्या कहा

महापौर ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के केवल 14 जिलों में ही एनीमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) से संबंधित गतिविधियां संचालित हो रही हैं, लेकिन अब इस व्यवस्था का विस्तार चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में किया जाएगा। प्रथम चरण में सभी जिला स्तरीय नगरीय निकायों में एबीसी सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके तहत उज्जैन जैसे बड़े शहरों में तीन एबीसी केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे श्वानों की आबादी को वैज्ञानिक और मानवीय तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।

भोपाल और इंदौर जैसे महानगरों में पांच-पांच एबीसी केंद्र

राज्य स्तर पर बनाई गई योजना के अनुसार भोपाल और इंदौर जैसे महानगरों में पांच-पांच एबीसी केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जबकि ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में तीन-तीन केंद्र खोले जाएंगे। अन्य जिला मुख्यालयों में कम से कम एक एबीसी केंद्र की स्थापना अनिवार्य रूप से की जाएगी। इसी क्रम में उज्जैन नगर निगम क्षेत्र में पांच आश्रय स्थलों की स्थापना प्रस्तावित है, ताकि श्वानों के संरक्षण और देखरेख के लिए पर्याप्त आधारभूत ढांचा उपलब्ध हो सके।

दो महीने पहले कोर्ट ने दिए थे ये आदेश

लगभग दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थलों (जैसे स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और राजमार्गों) से आठ सप्ताह के भीतर आवारा श्वानों को हटाने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पकड़े गए कुत्तों को दोबारा उसी स्थान पर नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि शेल्टर होम में रखा जाएगा। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को भोजन कराने पर भी रोक लगाई गई है।



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