उज्जैन में महाकाल के महानिर्वाणी अखाड़े में जल्द हो सकती है महंत की नियुक्ति


विनितगिरि जी महाराज लगातार आठ सालों से महंत के रूप में भगवान महाकाल को भस्म अर्पित करने के साथ, अखाड़े की संपूर्ण व्यवस्था का संचालन कर रहे थे। …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 19 Mar 2026 11:04:42 AM (IST)Updated Date: Thu, 19 Mar 2026 11:16:21 AM (IST)

उज्जैन में महाकाल के महानिर्वाणी अखाड़े में जल्द हो सकती है महंत की नियुक्ति
महाकाल मंदिर उज्जैन और विनितगिरि जी महाराज।

HighLights

  1. महंत विनितगिरि महाराज ने स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ने का मन बना लिया है
  2. उन्हें पीठ दर्द की समस्या हुई, डॉक्टर ने उन्हें रीढ़ में एल-4, एल-5 की समस्या बताई
  3. उनका अनुरोध स्वीकार करते हुए अखाड़े ने नए महंत की तलाश शुरू कर दी है

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर के महानिर्वाणी अखाड़े में नए महंत की नियुक्ति हो सकती है। सूत्र बताते हैं वर्तमान महंत विनितगिरि महाराज ने स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ने का मन बना लिया है। बताया जा रहा है एक-दो दिन में अखाड़े के पंच उज्जैन आएंगे और नए महंत की नियुक्ति पर स्वीकृति की मोहर लगाएंगे।

वर्ष 2019 में प्रकाश पुरी जी के अस्वस्थ होने तथा कालावड स्थित अपने आश्रम में विश्राम के लिए जाने के बाद महानिर्वाणी अखाड़े ने युवा महंत विनितगिरि जी महाराज को अखाड़े की कमान सौंपी थी। विनितगिरि जी महाराज लगातार आठ सालों से महंत के रूप में भगवान महाकाल को भस्म अर्पित करने के साथ, अखाड़े की संपूर्ण व्यवस्था का संचालन कर रहे थे।

अखाड़े ने महंत की तलाश शुरू कर दी है

कुछ समय पहले उन्हें पीठ दर्द की समस्या हुई। डॉक्टर ने उन्हें रीढ़ में एल-4, एल-5 की समस्या बताई। पिछले एक महीने से वह स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। विश्वसनीय सूत्र बताते हैं उन्होंने स्वयं ही अपनी इस परेशानी से अखाड़े को अवगत कराते हुए नए महंत की नियुक्ति करने का अनुरोध किया है, जिसे स्वीकार करते हुए अखाड़े ने नए महंत की तलाश शुरू कर दी है।

अखाड़े के पास महत्वपूर्ण दायित्व

महाकाल मंदिर में महानिर्वाणी अखाड़े के पास महत्वपूर्ण दायित्व है। अखाड़े के महंत अथवा उनके प्रतिनिधि प्रतिदिन तड़के 4 बजे होने वाली भस्म आरती में भगवान महाकाल को भस्म अर्पण करते हैं। मंदिर परिसर में ओंकारेश्वर तथा प्रथम तल पर स्थित नागचंदेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना का दायित्व भी महानिर्वाणी अखाड़े के पास है। मंदिर के शिखर पर ध्वज आरोहण से पहले ध्वज का पूजन भी अखाड़े के महंत द्वारा ही किया जाता है।



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