उज्जैन के महाकाल मंदिर में 6 फरवरी से शुरू होगा शिवनवरात्र उत्सव, अब तक नजर नहीं आ रही तैयारियां
महाकाल मंदिर देश का एक मात्र ज्योतिर्लिंग है जहां फाल्गुन कृष्ण पंचमी से त्रयोदशी तक नौ दिन शिवनवरात्र के रूप में महाशिवरात्रि उत्सव मनाया जाता है। इस …और पढ़ें

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 6 फरवरी से शिवनवरात्र का आरंभ होगा। महापर्व शुरू होने में मात्र 11 दिन का समय शेष रह गया हैं, लेकिन अब तक तैयारी नजर नहीं आ रही है। शिवनवरात्र के नौ दिन मंदिर में आस्था का ज्वार दिखाई देगा। भक्त दूल्हा बने महाकाल के दर्शन करने के लिए उमड़ेंगे। 12 ज्योतिर्लिंगों में महाकाल एक मात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है, जहां शिवनवरात्र के रूप में शिव पार्वती विवाह का उत्सव नौ दिन मनाया जाता है।
फाल्गुन कृष्ण पंचमी से त्रयोदशी तक चलने वाले इस उत्सव में भगवान महाकाल की पूजा का विशेष अनुक्रम रहता है। इस बार शिवनवरात्र उत्सव 6 से 15 फरवरी तक रहेगा। मंदिर की परंपरा अनुसार महाशिवरात्रि पर कोटीतीर्थ कुंड की सफाई, मंदिर के शिखर तथा परिसर में रंगरोगन, मंदिर में लगी चांदी व पीतल की वस्तुओं पर पालिश आदि कार्य किए जाते हैं। हालांकि मंदिर में फिलहाल ऐसी कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है।
जनसंपर्क विभाग में ताले, कर्मचारी संभाल रहे काम
महाकाल मंदिर का जनसंपर्क विभाग एक रील बनाने वाले कर्मचारी के भरोसे चल रहा है। मंदिर की गतिविधियों की जानकारी समय पर नहीं मिल पा रही है। बताया जाता है जनसंपर्क विभाग में तालाबंदी जैसी स्थिति है। मंदिर प्रशासन को समय पर काम नहीं होने की जानकारी है, लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं किया जा रहा है।
महाकाल सूबे का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां जनसंपर्क अधिकारी की विधिवत नियुक्ति है, लेकिन इन्हें जिम्मेदारी से मुक्त कर रखा है। मंदिर प्रशासन स्वास्थ्य वर्धक रागी के लड्डू की भी ब्रांडिंग नहीं कर पा रहा है।
कोटीतीर्थ कुंड की भी नहीं की गई सफाई
महाकाल मंदिर देश का एक मात्र ज्योतिर्लिंग है जहां फाल्गुन कृष्ण पंचमी से त्रयोदशी तक नौ दिन शिवनवरात्र के रूप में महाशिवरात्रि उत्सव मनाया जाता है। इस बार 6 फरवरी से शिवनवरात्र उत्सव की शुरुआत होगी। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। महापर्व शुरू होने में दस दिन का समय शेष है, लेकिन अब तक तैयारी नजर नहीं आ रही है।
मंदिर की पूजन परंपरा में महाशिवरात्रि से पहले कोटितीर्थ कुंड की साफ सफाई, मंदिर के शिखर व परिसर में रंग रोगन। मंदिर में लगी चांदी व पीतल की वस्तुओं की सफाई तथा पालिश का काम प्रमुखता से होता है। लेकिन अब तक इन कामों के शुरू होने की मंदिर प्रशासन की ओर से जानकारी नहीं मिली है।