‘भव्य रिवर फ्रंट’ के रूप में विकसित होंगे शिप्रा नदी के तट, 64 करोड़ रुपए होंगे खर्च, 18 माह में संवारने की योजना


नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के तटों को ‘भव्य रिवर फ्रंट’ के रूप में विकसित करने की 64.24 करोड़ की परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है।

नगर निगम ने ‘वाटर रिजुवेनेशन प्रोजेक्ट’ के तहत नदी तटों का संरक्षण, घाटों का पुनर्विकास और आधुनिक जनसुविधाओं का निर्माण अगले 18 महीनों में कराना तय किया है। ताकि सिंहस्थ से पहले श्रद्धालुओं को सुव्यवस्थित और सुरक्षित घाट उपलब्ध हो सकें।

क्या है परियोजना का मूल उद्देश्य

परियोजना का मूल फोकस शिप्रा के पारिस्थितिक संतुलन को सुधारते हुए उसकी धार्मिक गरिमा को संरक्षित करना है। योजना अनुसार लगभग नौ किमी लंबे पुराने घाटों की मरम्मत कर पारंपरिक पत्थर की शैली में छतरियां, मंडप, मेहराब और शेड बनाए जाएंगे

नदी किनारे लैंडस्केपिंग, हरित बफर जोन

नदी किनारे लैंडस्केपिंग, हरित बफर जोन और पैदल प्रोमेनेड विकसित कर घाटों को एकीकृत रिवर फ्रंट का स्वरूप दिया जाएगा। इसके साथ ही बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए रैंप, रेलिंग और बैरियर-फ्री पहुंच मार्ग बनाए जाएंगे, जिससे भीड़ के दबाव में भी सुरक्षित आवागमन संभव हो सके।

पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य

प्रशासन का लक्ष्य है कि सिंहस्थ से काफी पहले प्रमुख घाटों का ढांचा तैयार हो जाए। निर्माण के बाद संबंधित एजेंसी को पांच वर्षों तक संचालन और रखरखाव करना होगा। शुरुआती दो वर्ष डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड होंगे, जिसमें किसी भी तकनीकी कमी की जवाबदेही एजेंसी की रहेगी। गुणवत्ता नियंत्रण, सुरक्षा मानक और पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा।

सिंहस्थ की जरूरतों के अनुसार प्लानिंग

परियोजना में भीड़ प्रबंधन, कचरा निस्तारण, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र को विशेष रूप से शामिल किया गया है। घाटों पर हाई-मास्ट लाइट, सर्च लाइट, चेतावनी सायरन, गार्ड रूम और पेयजल सुविधाएं विकसित होंगी। इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही के दौरान दुर्घटना जोखिम कम होगा और घाटों पर ठहराव की क्षमता बढ़ेगी।

रिवरफ्रंट बनने से क्षिप्रा तट केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन आकर्षण के रूप में भी विकसित होगा। सुंदर प्रोमेनेड, बैठने की व्यवस्था और हरित क्षेत्र स्थानीय नागरिकों के लिए भी सार्वजनिक स्पेस का काम करेंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे उज्जैन का धार्मिक पर्यटन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगा।

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प्रोजेक्ट के प्रमुख कार्य

  • पुराने घाटों का पत्थर से पुनर्विकास और संरचनात्मक मजबूती
  • नदी किनारे प्रोमेनेड, लैंडस्केपिंग और ग्रीन बफर जोन
  • छतरियां, मंडप, शेड, सुरक्षा रेलिंग और बैरियर
  • फ्री रैंप – हाई-मास्ट लाइट, सर्च लाइट, चेतावनी सायरन व गार्ड रूम
  • पेयजल, पहुंच मार्ग और भीड़ प्रबंधन की सुविधाएं
  • जल शुद्धीकरण व पारिस्थितिक संतुलन सुधार के उपाय



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