उज्जैन के अखाड़ा परिषद का बड़ा फैसला, विनीत गिरी महाराज ही संभालेंगे महानिर्वाणी अखाड़े और भस्म आरती की जिम्मेदारी


ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में महानिर्वाणी अखाड़े की गादी पर महंत की जिम्मेदारी के साथ विनीत गिरी महाराज बने रहेंगे। …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 21 Mar 2026 09:55:29 PM (IST)Updated Date: Sat, 21 Mar 2026 09:55:29 PM (IST)

उज्जैन के अखाड़ा परिषद का बड़ा फैसला, विनीत गिरी महाराज ही संभालेंगे महानिर्वाणी अखाड़े और भस्म आरती की जिम्मेदारी
विनीत गिरी संभालेंगे महानिर्वाणी अखाड़े की जिम्मेदारी।

HighLights

  1. उज्जैन के अखाड़ा परिषद का बड़ा फैसला।
  2. विनीत गिरी संभालेंगे महानिर्वाणी अखाड़े की जिम्मेदारी।
  3. पंचों ने नामंजूर की जिम्मेदारी छोड़ने की पेशकश।

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में महानिर्वाणी अखाड़े की गादी पर महंत की जिम्मेदारी के साथ विनीत गिरी महाराज बने रहेंगे। इस जिम्मेदारी के साथ वह भस्म आरती में बाबा महाकाल को भस्म भी चढ़ाएंगे।

अखाड़ा पंचों ने अस्वीकारी विनीत गिरी की पेशकश

असल में, महंत विनीत महाराज ने स्वास्थ्य कारणों से अखाड़े की गादी और भस्म आरती में भस्म चढ़ाने की जिम्मेदारी से स्वयं को मुक्त करने की पेशकश की थी। इसे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पंचों की महंत रवींद्र पुरी महाराज की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई बैठक में सर्वसम्मति से अस्वीकार कर दिया गया।

2028 सिंहस्थ महाकुंभ का नेतृत्व भी संभालेंगे

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्रीपंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव महंत रवींद्र पुरी महाराज ने शनिवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि पंचों ने उज्जैन में 2028 में होने वाला सिंहस्थ महाकुंभ अखाड़ा की ओर से उन्हीं के नेतृत्व में करने का निर्णय लिया है। वह भस्म आरती में भस्म अर्पित करने समेत ज्योतिर्लिंग में अन्य समस्त जिम्मेदारियों का निर्वहन पूर्ववत करते रहेंगे।

हालांकि उनके स्वास्थ्य को दृष्टिगत उन्हें कुछ सहयोगी प्रदान किए जा सकते हैं। अखाड़ा पंचों में महंत जमानापुरी महाराज, महंत रमेश गिरि महाराज, महंत मृत्युंजय भारती, मनोज गिरि महाराज, महंत प्रेमपुरी महाराज, करण गिरि महाराज, गोपाल गिरि महाराज भी शामिल रहे।

अखाड़े के पास हैं महत्वपूर्ण दायित्व

बता दें कि महाकाल मंदिर में महानिर्वाणी अखाड़े तथा महंत के पास महत्वपूर्ण दायित्व हैं। अखाड़े के महंत द्वारा प्रतिदिन भस्म आरती में भगवान को भस्म अर्पित की जाती है। परिसर स्थित श्री ओंकारेश्वर तथा मंदिर के शीर्ष पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर की पूजा-अर्चना के अलावा मंदिर के शिखर पर चढ़ाए जाने वाले ध्वज का पूजन भी महानिर्वाणी अखाड़े के महंत अथवा उनके प्रतिनिधि द्वारा किया जाता है।



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