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21 मार्च को दिन-रात होंगे बराबर, देशभर में दिखेगा खगोलीय संतुलन का अनोखा नजारा


वसंत संपात की इस खगोलीय घटना को उज्जैन की वेधशाला में शंकु यंत्र और नाड़ीवलय यंत्र के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकेगा। …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 20 Mar 2026 07:51:54 AM (IST)Updated Date: Fri, 20 Mar 2026 08:13:17 AM (IST)

उज्जैन वेधशाल की फाइल फोटो।

HighLights

  1. 21 मार्च के बाद सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर बढ़ने लगता है
  2. उत्तरी हिस्सों में दिन धीरे-धीरे बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं
  3. शंकु यंत्र और नाड़ीवलय यंत्र से दिखती है खगोलीय घटना

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। शनिवार 21 मार्च को देशभर में एक खास खगोलीय घटना ‘वसंत संपात’ देखने को मिलेगी, जब दिन और रात लगभग बराबर होंगे। यानी 12 घंटे की रात और 12 घंटे का दिन। शासकीय जीवाजी वेधशाला के अनुसार, इस दिन सूर्य भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर स्थित होता है, जिसके कारण पूरी पृथ्वी पर दिन-रात का समय संतुलित हो जाता है।

वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश ने बताया कि 21 मार्च के बाद सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर बढ़ने लगता है, जिससे भारत सहित उत्तरी हिस्सों में दिन धीरे-धीरे बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। वहीं, दक्षिणी गोलार्द्ध में इसका उल्टा प्रभाव देखने को मिलेगा। इस खगोलीय घटना को उज्जैन की वेधशाला में शंकु यंत्र और नाड़ीवलय यंत्र के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकेगा।

विज्ञान को करीब से समझें

21 मार्च को शंकु की छाया सीधी रेखा में दिखाई देगी, जो इस संतुलन का स्पष्ट प्रमाण है। नाड़ीवलय यंत्र के जरिए भी सूर्य की स्थिति में बदलाव को समझा जा सकता है। वेधशाला ने विद्यार्थियों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस अवसर पर पहुंचकर इस दुर्लभ खगोलीय घटना का अवलोकन करें और विज्ञान को करीब से समझें।



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