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17 बच्चों की मौत के मामले में सेवाधाम आश्रम पहुंचा हाई कोर्ट का जांच दल, आश्रम के देखे रिकॉर्ड, 12 मार्च को पेश होगी रिपोर्ट


नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। इंदौर के युगपुरुष आश्रम से उज्जैन के सेवाधाम भेजे गए 86 बच्चों में से 17 की मौत के मामले में हाई कोर्ट द्वारा गठित जांच दल शनिवार को उज्जैन पहुंचा। चार सदस्यीय दल ने आश्रम के रिकार्ड देखे, स्टाफ से बात की। 12 मार्च को कोर्ट में सुनवाई के दौरान उसे अपनी रिपोर्ट पेश करनी है। हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव, उज्जैन जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी तथा सेवाधाम आश्रम के अधीक्षक को नोटिस जारी कर जवाब मांग था।

कोर्ट ने राज्य सरकार से प्रदेश में संचालित सभी चाइल्ड केयर होम और अनाथालयों की संख्या, उनकी वर्तमान स्थिति और हालिया निरीक्षण रिपोर्ट भी मांगी है। वरिष्ठ अधिवक्ता को न्यायमित्र नियुक्त किया है, ताकि मामले की निष्पक्ष निगरानी हो सके।

यह है मामला

जून-जुलाई 2024 में इंदौर के युगपुरुष आश्रम में हैजे से हुई 10 बच्चों की मौत के बाद शासन ने वहां के 86 बच्चों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में शिफ्ट किया था। इनमें से 17 बच्चों की जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच मौत हो गई, सात बच्चे 18 वर्ष की उम्र पार कर चुके थे। सरकारी रिकॉर्ड में अधिकांश की मौतों का कारण सांस लेने में तकलीफ दर्ज है।

इन बच्चों की हुई थी मौत

कविशा (8), हिमानी (13), बबलू (7), संदेश (10), ध्वनि पारुल (12), पवन (16) और खुशी (17), कार्तिक (7), कुमकुम (18), स्वर्णा (12), छोटू उर्फ अटल (18), सुहानी (18), विनीता (18), किरण (19), कृष्णा साहू (19), निहारिका (19), पार्वती (20)। रिकॉर्ड में अधिकांश मौतों का कारण सांस लेने में तकलीफ दर्ज है।

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संचालक बोल चुके- अब नहीं चलाएंगे बाल आश्रम

आश्रम संचालक सुधीरभाई गोयल एक दिन पहले ‘नईदुनिया’ से कह चुके हैं कि वे अब दिव्यांग बालक-बालिकाओं का आश्रम संचालित नहीं करेंगे और इस संबंध में विभाग को पत्र भेज चुके हैं। उनका दावा है कि इंदौर से आए बच्चे पहले से गंभीर बीमारियों, कुपोषण और संक्रमण से ग्रसित थे तथा मेडिकल रिकॉर्ड अधूरा था। उन्होंने कहा कि भविष्य में वे केवल वृद्ध सेवा कार्य जारी रखेंगे।

सरकारी व्यवस्था पर भी उठे प्रश्न

उल्लेखनीय है कि 17 बच्चों की मौत के इस मामले में सरकारी व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े हुए हैं। फिलहाल ऐसे बच्चों के लिए शासन स्तर पर कोई ठोस इंतजाम नहीं हैं। हाई कोर्ट के जांच दल ने इस बिंदु पर भी पड़ताल की है। दल अपने सुझाव भी कोर्ट के समक्ष रखेगा।



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