धीरज गोमे, नईदुनिया, उज्जैन। सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन की बदलती तस्वीर को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार ने अब राष्ट्रीय स्तर के डिजिटल इन्फ्लुएंसरों का सहारा लिया है। ‘महाकाल की पावन नगरी से लेकर 18,500 करोड़ रुपये के महा विकास तक’ अब रील और शॉर्ट वीडियो के जरिए पूरा देश ‘नए उज्जैन’ का साक्षात्कार करेगा।
सोशल मीडिया क्रिएटर उज्जैन बुलाए जाएंगे
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार अलग-अलग राज्यों से सोशल मीडिया क्रिएटर उज्जैन बुलाए जाएंगे। वे यहां की हजारों साल पुरानी विरासत, धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान और सिंहस्थ के लिए हो रहे हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्यों को रील, शॉर्ट वीडियो और दूसरे डिजिटल कंटेंट के जरिए अपने दर्शकों तक पहुंचाएंगे।
अभियान की शुरुआत बिहार के 16 सदस्यीय इन्फ्लुएंसर दल से हुई है, जिसने उज्जैन में आकर विकास कार्यों और प्रमुख स्थलों को कैमरे में कैद करना शुरू किया है।
सरकारी विज्ञापन से मोबाइल स्क्रीन तक का सफर
यह बदलाव सिर्फ प्रचार का तरीका बदलने भर का नहीं है। सरकार अब उज्जैन की कहानी को अपने आधिकारिक माध्यमों से बाहर निकालकर उन डिजिटल प्लेटफॉर्मों तक ले जाना चाहती है, जहां करोड़ों युवा रोज कंटेंट देखते हैं।
एक इन्फ्लुएंसर अपनी भाषा, अपने अनुभव और अपने कैमरे से उज्जैन को दिखाएगा। यानी महाकाल का दर्शन करने आया श्रद्धालु हो या पहली बार उज्जैन का नाम सुन रहा युवा- उसके मोबाइल पर शहर की कहानी रील के रूप में पहुंचेगी।
कुल निवेश का अनुमान और बढ़ा
इस रणनीति में उज्जैन की सबसे बड़ी ताकत उसकी विरासत और वर्तमान में हो रहा अभूतपूर्व अधोसंरचना निर्माण है। 10 लाख से कम आबादी वाले शहर में सिंहस्थ के लिए करीब 18,500 करोड़ रुपये के कामों का आकार सरकार के मौजूदा आकलन में सामने आ रहा है।
सड़क, पुल, घाट, पेयजल, सीवरेज, बिजली, पार्किंग और यातायात जैसी सुविधाओं पर एक साथ काम हो रहा है। सरकारी आंकड़ों में फरवरी 2026 तक 128 प्रमुख परियोजनाओं की लागत 13,752 करोड़ रुपये दर्ज थी। अब परियोजनाओं के विस्तार के साथ कुल निवेश का अनुमान और बढ़ा है।
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बिहार के दल ने किया प्रमुख स्थलों का अवलोकन
बिहार से आए 16 इन्फ्लुएंसरों ने महाकाल महालोक, सांदीपनि आश्रम और कालभैरव मंदिर के साथ कान्ह डायवर्जन क्लोज्ड डक्ट टनल, सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना और हरियाखेड़ी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का भी अवलोकन किया।
धन्वंतरि आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय की प्रयोगशालाओं और संग्रहालयों को भी देखा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनसे संवाद कर वीर भारत संग्रहालय, सर्प उद्यान, महाकाल महालोक और सिंहस्थ की तैयारियों की जानकारी दी।
यानी सरकार जिस उज्जैन को डिजिटल दुनिया के सामने रखना चाहती है, उसमें सिर्फ मंदिर और धार्मिक पर्यटन नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, पर्यावरण, शिक्षा, आधुनिक अधोसंरचना और सिंहस्थ की तैयारियां भी शामिल हैं।

