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रंगपंचमी पर महाकाल की अनोखी होली, मंदिर में केसर जल से होगा पूजन; रंग-गुलाल लाने पर रहेगा पूर्ण प्रतिबंध


ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में रविवार को रंगपंचमी का पर्व विशेष परंपराओं के साथ मनाया जाएगा। तड़के चार बजे होने वाली भस्म आरती में भगवान महाकाल के …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 07 Mar 2026 09:04:54 PM (IST)Updated Date: Sat, 07 Mar 2026 09:04:54 PM (IST)

रंगपंचमी पर महाकाल की अनोखी होली

HighLights

  1. रंगपंचमी पर भस्म आरती में भगवान महाकाल को अर्पित होगा केसर जल
  2. शाम सात बजे निकलेगा महाकालेश्वर ध्वज चल समारोह, 27 दल होंगे शामिल
  3. मंदिर परिसर में रंग-गुलाल और प्रेशर गन ले जाने पर रहेगा प्रतिबंध

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में रविवार को रंगपंचमी का पर्व विशेष परंपराओं के साथ मनाया जाएगा। तड़के चार बजे होने वाली भस्म आरती में भगवान महाकाल केसरिया रंग से होली खेलेंगे और उन्हें एक लोटा केसर जल अर्पित किया जाएगा।

मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर की पूजन परंपरा के अनुसार राजा के आंगन में रंग-रंगीली होली का आयोजन होगा। सुबह भस्म आरती के दौरान पुजारी भगवान महाकाल को एक लोटा केसरिया रंग अर्पित कर पर्व मनाएंगे।

एक लोटा केसरिया रंग

शाम को संध्या आरती में भगवान को एक लोटा केसरिया रंग के साथ 500 ग्राम गुलाल भी अर्पित किया जाएगा। मंदिर में पुजारी, पुरोहित, उनके सेवक और भक्तों के होली खेलने पर प्रतिबंध रहेगा। मंदिर परिसर में रंग, गुलाल और प्रेशर गन जैसे उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी। प्रवेश द्वारों पर तैनात सुरक्षाकर्मी जांच के बाद ही श्रद्धालुओं को प्रवेश देंगे। मंदिर समिति ने दर्शनार्थियों से अपील की है कि वे रंग-गुलाल या रंग उड़ाने वाले उपकरण लेकर मंदिर न आएं।

शाम को निकलेगा ध्वज चल समारोह

रंगपंचमी के अवसर पर शाम सात बजे परंपरा अनुसार श्री महाकालेश्वर ध्वज चल समारोह निकाला जाएगा। मंदिर के पुजारी और पुरोहित परिवार की ओर से आयोजित इस समारोह की शुरुआत सभा मंडप में भगवान वीरभद्र की पूजा-अर्चना और ध्वज पूजन के बाद होगी।

पंडित संजय पुजारी के अनुसार इस बार ध्वज चल समारोह में 27 दल शामिल होंगे। इसमें नासिक की ढोल पार्टी और भगवान महाकाल के सेहरा दर्शन की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

भगवान महाकाल के प्रमुख गण हैं वीरभद्र

वीरभद्र भगवान महाकाल के प्रमुख गण माने जाते हैं। प्रतिदिन तड़के चार बजे भस्म आरती के लिए मंदिर के पट खोलने से पहले वीरभद्र से आज्ञा लेने की परंपरा है। उन्हें मंदिर की शौर्य परंपरा का प्रतीक भी माना जाता है, इसलिए ध्वज चल समारोह से पहले वीरभद्र की पूजा की जाती है।

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