नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार पर 12 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच उज्जैन ने भीड़ प्रबंधन की बड़ी परीक्षा को व्यवस्थित ढंग से संभाला। नागचंद्रेश्वर दर्शन, महाकाल दर्शन, बाबा महाकाल की सवारी और शहर का सामान्य यातायात—चार अलग-अलग तरह के दबाव एक ही दिन सामने थे।
प्रशासन ने इन प्रवाहों को अलग रखने के लिए पुलिस बल, बैरिकेडिंग, डायवर्शन और अलग-अलग मार्गों की व्यवस्था की। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को लगातार बनाए रखने में मदद मिली और आयोजन व्यवस्थित रहा।
नागपंचमी का यह अनुभव सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वास्तविक भीड़ के बीच की गई तैयारी कागज पर तैयार योजना से ज्यादा उपयोगी होती है। एक दिन में लाखों श्रद्धालुओं के आने से प्रशासन को यह समझने का अवसर मिला कि कौन-से मार्ग दबाव संभाल सकते हैं, कहां प्रवाह धीमा होता है और किस व्यवस्था से भीड़ को सहजता से आगे बढ़ाया जा सकता है।
उज्जैन की व्यवस्था में क्या काम आया
महाकाल क्षेत्र में श्रद्धालुओं के प्रवाह को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की रणनीति महत्वपूर्ण रही। नागचंद्रेश्वर दर्शन के लिए अलग व्यवस्था, महाकाल दर्शन के लिए निर्धारित प्रवेश-निकास और सवारी के लिए अलग मार्ग ने भीड़ को एक ही स्थान पर केंद्रित होने से बचाया। शहर के ट्रैफिक को भी आयोजन के दबाव से अलग रखने के लिए डायवर्शन लागू किए गए।
इसका फायदा यह हुआ कि धार्मिक आयोजन की भीड़ और सामान्य वाहन यातायात एक ही प्रवाह में नहीं आए। बैरिकेडिंग का इस्तेमाल केवल रास्ता रोकने के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को तय दिशा में आगे बढ़ाने के लिए किया गया।
सिंहस्थ के लिए मिला वास्तविक अनुभव
नागपंचमी ने यह अवसर दिया कि भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं को वास्तविक परिस्थितियों में परखा जा सके। अब इस अनुभव को सिंहस्थ की तैयारी में शामिल किया जा सकता है। किस मार्ग पर कितना दबाव रहा, कहां अतिरिक्त व्यवस्था की जरूरत पड़ी और कौन-से डायवर्शन प्रभावी रहे—इनका विश्लेषण भविष्य की प्लानिंग को और सटीक बनाएगा।
सिंहस्थ में भीड़ का पैमाना बड़ा होगा। घाटों पर स्नान, मंदिरों में दर्शन, अखाड़ों के आयोजन, पार्किंग और शहर के प्रमुख मार्ग एक साथ सक्रिय होंगे। ऐसे में नागपंचमी से मिली सीख के आधार पर जोन आधारित क्राउड मैनेजमेंट, सुरक्षित होल्डिंग एरिया, वैकल्पिक निकासी और रियल टाइम मॉनिटरिंग को और मजबूत किया जा सकता है।
दूसरे धार्मिक आयोजनों के लिए भी उपयोगी
उज्जैन का अनुभव यह बताता है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ को केवल संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि उसके प्रवाह, दिशा और समय के आधार पर मैनेज करना ज्यादा प्रभावी है। दर्शन, जुलूस और सामान्य यातायात को अलग-अलग प्रवाह में रखना कई बड़े धार्मिक आयोजनों में अपनाया जा सकने वाला व्यावहारिक तरीका है।

