उज्जैन का महिदपुर कस्बा अब विकास के साथ अपनी बहुआयामी विरासत के लिए चर्चा में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि नारायणा गांव भगवान श्रीकृष्ण औ …और पढ़ें

HighLights
- नारायणा गांव भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का साक्षी है
- पुराने समय में उज्जैन में हालात ठीक न होने पर यहां सिंहस्थ हुआ था
- यहीं पर डोंगला में आधुनिक ऑब्जर्वेटरी बनी है
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। एक ऐसा कस्बा, जहां भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की स्मृतियां हैं। जहां सिंहस्थ की ऐतिहासिक परंपरा से जुड़े प्रसंग मिलते हैं, जहां वीरता और संघर्ष की गाथाएं सुनाई देती हैं और जहां से भविष्य में दुनिया का स्टैंडर्ड टाइम तय करने का सपना देखा जा रहा है। मालवा अंचल का महिदपुर इन दिनों विकास परियोजनाओं के कारण चर्चा में है, लेकिन इसकी असली पहचान इसकी बहुआयामी विरासत में छिपी हुई है।
महिदपुर की पहचान का सबसे प्राचीन और लोकप्रिय पक्ष नारायणा गांव से जुड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में यहां आयोजित कार्यक्रम में कहा कि नारायणा गांव भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का साक्षी रहा है। यही कारण है कि यह क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। मालवा के ग्रामीण अंचल में आज भी इस प्रसंग का उल्लेख श्रद्धा और गौरव के साथ किया जाता है।
महिदपुर का दूसरा बड़ा परिचय इसका ऐतिहासिक महत्व है। यह क्षेत्र उन घटनाओं का साक्षी रहा है जिन्होंने समय-समय पर मालवा की पहचान को आकार दिया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में महारानी गंगाबाई और 1857 की क्रांति के सूर्यवीरों के अदम्य साहस का उल्लेख करते हुए कहा कि महिदपुर की ऐतिहासिक धरती पर लड़े गए संघर्षों ने इतिहास में अमिट छाप छोड़ी है। यहां की मिट्टी में आज भी उस संघर्ष और स्वाभिमान की स्मृतियां जीवित हैं।
महिदपुर में सिंहस्थ का आयोजन कराया गया था
इतिहास और आस्था के बीच महिदपुर का संबंध सिंहस्थ की परंपरा से भी जुड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराने समय में जब उज्जैन में परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं, तब महिदपुर में सिंहस्थ का आयोजन कराया गया था। महिदपुर में महारानी गंगाबाई के नाम पर बना घाट आज भी उस विरासत की याद दिलाता है।
यह प्रसंग महिदपुर को केवल एक कस्बे से आगे बढ़ाकर मालवा की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा बनाता हैमहिदपुर की सबसे नई और सबसे अनोखी पहचान डोंगला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य और आर्यभट्ट की विरासत को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने यहां आधुनिक ऑब्जर्वेटरी का निर्माण कराया है।
डोंगला आज खगोल विज्ञान और कालगणना के संदर्भ में नई पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री ने यहां तक कहा कि दुनिया अपनी घड़ियों का स्टैंडर्ड टाइम डोंगला से तय करे, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। यह महत्वाकांक्षी विचार महिदपुर को अतीत की विरासत से जोड़ते हुए भविष्य की संभावनाओं से भी जोड़ता है।
महिदपुर को खास बनाती हैं ये पांच पहचान
- नारायणा गांव : कृष्ण और सुदामा की मित्रता से जुड़ी मान्यताओं का केंद्र
- सिंहस्थ की विरासत : महिदपुर में आयोजित सिंहस्थ से जुड़ी ऐतिहासिक स्मृतियां
- वीरता की धरती : महारानी गंगाबाई और स्वतंत्रता संग्राम के सूर्यवीरों का उल्लेख
- डोंगला आब्जर्वेटरी : आधुनिक वेधशाला और कालगणना से जुड़ी नई पहचान