किसानों के आक्रामक और संगठित आंदोलन को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने Land pooling Act को वापस ले लिया है। उज्जैन से शुरू हुए विरोध ने राज्यस्तरीय आंद …और पढ़ें
HighLights
- लैंड पूलिंग एक्ट के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन से झुकी सरकार
- किसानों को संतुष्ट करने के लिए पहले एक्ट में आंशिक संसोधन
- 26 दिसंबर से किसानों के ‘डेरा डालो–घेरा डालो आंदोलन’ थी
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन: लैंड पूलिंग एक्ट के खिलाफ किसानों के आक्रामक और संगठित आंदोलन के आगे आखिरकार राज्य सरकार को झुकना पड़ा। उज्जैन से शुरू हुए विरोध ने राज्यस्तरीय आंदोलन का रूप ले लिया और आखिरकार सरकार ने लैंड पूलिंग एक्ट को पूरी तरह निरस्त करने का निर्णय घोषित कर दिया।
यह वही एक्ट है, जिसमें पहले आंशिक संशोधन कर किसानों को संतुष्ट करने की कोशिश की गई थी, लेकिन किसान संगठनों ने इसे सिरे से नकार दिया था। लैंड पूलिंग एक्ट निरस्त कराने की आंदोलनात्मक शुरुआत करीब तीन महीने पहले शहर में निकाली गई ट्रैक्टर रैली से हुई थी। इसके बाद 5 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर महिला किसानों ने रामघाट पर दीपदान कर हाथों में तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन किया। सरकार को “सद्बुद्धि” देने के उद्देश्य से यज्ञ भी किया गया।
दबाव के चलते 17 नवंबर को सरकार ने एक्ट निरस्त करने की घोषणा तो की, लेकिन जब गजट नोटिफिकेशन सामने आया तो उसमें एक्ट को पूरी तरह खत्म करने के बजाय केवल संशोधन दर्ज थे। इससे किसानों में आक्रोश फैल गया और विभिन्न स्तरों पर ज्ञापन सौंपे गए।
26 से थी आंदोलन की तैयारी
- स्थिति तब और गंभीर हो गई जब दो दिन पहले रविवार को किसान संगठनों ने बैठक कर 26 दिसंबर से उज्जैन में ‘डेरा डालो–घेरा डालो आंदोलन’ शुरू करने का निर्णय लिया।
- भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किए गए इस ऐलान ने प्रशासन और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी।
- किसानों ने साफ कर दिया कि जब तक लिखित रूप में एक्ट को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
- किसानों का तर्क था कि सिंहस्थ मेला क्षेत्र सहित कई इलाकों में लैंड पूलिंग के माध्यम से जमीन लेकर स्थायी कंक्रीट निर्माण की तैयारी की जा रही है, जबकि सिंहस्थ सदियों से अस्थायी स्वरूप में आयोजित होता आया है।
- तंबू, टेंट और अखाड़ों पर आधारित इस आयोजन के लिए किसानों की जमीन स्थायी रूप से लेना उनकी आजीविका और सांस्कृतिक परंपराओं-दोनों पर सीधा हमला है।
- यही वजह रही कि सरकार के संशोधन किसानों को मंजूर नहीं हुए।
भारतीय किसान संघ ने चेतावनी दी थी कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो प्रदेश के 18 जिलों की 115 तहसीलों से हजारों किसान उज्जैन पहुंचकर डेरा डालेंगे और प्रशासनिक कार्यालयों का घेराव करेंगे। इस अल्टीमेटम का सीधा असर हुआ और सरकार ने अंततः लैंड पूलिंग एक्ट को पूरी तरह निरस्त करने का फैसला लिया।

