धीरज गोमे, नईदुनिया, उज्जैन। श्रावण में उज्जैन आने वाला हर श्रद्धालु, सिंहस्थ-2028 की तैयारी का हिस्सा बनेगा। वह किस शहर से आया, किस वाहन से पहुंचा, किन रास्तों से गुजरा, कहां पार्किंग की, शहर में कितनी देर रुका और दर्शन के बाद किस मार्ग से लौटा, इसका पूरा रिकॉर्ड (डेटा बैस) तैयार किया जाएगा। ये देश का सबसे बड़े तीर्थयात्री सर्वे होगा, जिसे कराने को उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू की है।
प्रशासनिक दस्तावेज के अनुसार यह सर्वे केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यही डेटा सिंहस्थ-2028 की पूरी तैयारी का वैज्ञानिक आधार बनेगा। ट्रैफिक व्यवस्था से लेकर पार्किंग, भीड़ प्रबंधन, सार्वजनिक परिवहन, सड़क नेटवर्क और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ी भविष्य की योजनाएं इसी रिपोर्ट के आधार पर तैयार होंगी।
सिंहस्थ की अभी से तैयारी
श्रावण में उज्जैन आने वाला हर श्रद्धालु सिंहस्थ-2028 की तैयारी का हिस्सा बनेगा। वह किस शहर से आया, किस वाहन से पहुंचा, किन रास्तों से गुजरा, कहां पार्किंग की और शहर में कितनी देर रुका, इसका पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
उज्जैन स्मार्ट सिटी की यही रिपोर्ट सिंहस्थ-2028 के ट्रैफिक, पार्किंग, भीड़ प्रबंधन और आधारभूत सुविधाओं की मास्टर प्लानिंग की नींव बनेगी। उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने गुरुवार को इस सर्वे के लिए निविदा जारी कर दी। एजेंसी का चयन खुली प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से होगा और सबसे कम वित्तीय बोली देने वाली पात्र एजेंसी को काम मिलेगा।
सर्वे का उद्देश्य केवल वाहनों की गिनती करना नहीं
सर्वे का उद्देश्य केवल वाहनों की गिनती करना नहीं है, बल्कि यह समझना है कि श्रद्धालु किस राज्य और शहर से आते हैं, किस माध्यम से यात्रा करते हैं, कौन-से मार्ग सबसे ज्यादा उपयोग करते हैं, शहर में कितनी देर रुकते हैं, पार्किंग की वास्तविक जरूरत क्या है और किन स्थानों पर सबसे अधिक भीड़ रहती है। इसी आधार पर सिंहस्थ-2028 के लिए सड़क, पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन, ट्रैफिक डायवर्जन और भीड़ नियंत्रण की योजनाएं तैयार की जाएंगी।
चार चरणों में होगा सर्वे
सर्वे चार चरणों में होगा। शहर के प्रवेश और निकास मार्गों पर वीडियो आधारित ट्रैफिक सर्वे किया जाएगा। सात प्रमुख मार्गों पर लगातार सात दिन और दो अन्य मार्गों पर तीन दिन तक वाहनों की गणना होगी। इसके अलावा सात स्थानों पर 48 घंटे का ओरिजिन-डेस्टिनेशन सर्वे होगा, जिससे यह पता चलेगा कि वाहन कहां से आए और किस दिशा में गए। 10 प्रमुख चौराहों पर वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही का अलग से अध्ययन किया जाएगा। सबसे अहम हिस्सा श्रद्धालु सर्वे होगा।
महाकाल, हरसिद्धि, कालभैरव और मंगलनाथ मंदिरों के साथ प्रमुख पार्किंग स्थलों, उज्जैन जंक्शन, विक्रम नगर, पिंगलेश्वर और नायखेड़ी रेलवे स्टेशन तथा नानाखेड़ा और देवासगेट बस स्टैंड पर श्रद्धालुओं से सीधे बातचीत कर जानकारी जुटाई जाएगी। इससे उनके यात्रा व्यवहार, ठहराव, आवागमन और सुविधाओं की जरूरत का विस्तृत डेटाबेस तैयार होगा।
सर्वे के दौरान जुटाए गए आंकड़ों का विश्लेषण कर ग्राफ, ट्रैफिक मैट्रिक्स और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि किस समय शहर पर सबसे अधिक दबाव रहता है, किन मार्गों पर अतिरिक्त व्यवस्था की जरूरत है और भविष्य में किन स्थानों पर नई पार्किंग या यातायात सुधार की आवश्यकता होगी। यह रिपोर्ट प्रशासन के लिए सिंहस्थ-2028 की स्थायी योजना तैयार करने का आधार बनेगी।
यह भी जानिये
चयनित एजेंसी को अनुबंध मिलने के तीन दिन के भीतर सर्वे शुरू करना होगा। काम अलग-अलग चरणों में पूरा करना होगा। समयसीमा का पालन नहीं करने पर प्रत्येक चरण में प्रति सप्ताह पांच प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जाएगा और लगातार देरी होने पर अनुबंध समाप्त भी किया जा सकेगा। अंतिम भुगतान सभी सर्वे, रिपोर्ट और प्रस्तुतीकरण पूरा होने के बाद ही किया जाएगा।
फैक्ट फाइल
- नौ प्रवेश-निकास मार्गों पर ट्रैफिक अध्ययन
- 10 प्रमुख चौराहों पर भीड़ और यातायात सर्वे
- प्रमुख मंदिर, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और पार्किंग पर श्रद्धालु इंटरव्यू
- सिंहस्थ-2028 की ट्रैफिक, पार्किंग और भीड़ प्रबंधन योजना का बनेगा आधार

