श्री पंच निर्मोही अणि अखाड़े के महामंडलेश्वर ज्ञानदासजी महाराज पर मंगलवार-बुधवार रात बड़नगर रोड स्थित हनुमानगढ़ी के पास जानलेवा हमला हुआ। …और पढ़ें

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। श्री पंच निर्मोही अणि अखाड़े के महामंडलेश्वर ज्ञानदासजी महाराज पर मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात बड़नगर रोड स्थित हनुमानगढ़ी के पास जानलेवा हमला हुआ। महाराजश्री ने बताया चार बदमाशों ने वारदात को अंजाम देने की नियत से उनकी कार रोकने का प्रयास किया। गाड़ी नहीं रोकने पर उन्होंने पत्थर फेंके। मामले की शिकायत पुलिस को की गई है। ये शिप्रा नदी की स्वच्छता के लिए आंदोलन कर रहे हैं।
महामंडलेश्वर ज्ञानदासजी महाराज का सदावल मार्ग पर संत दादूराम आश्रम है। महाराजश्री के सानिध्य में यहां नित्य नैमित्तिक क्रम से हवन, अनुष्ठान तथा शिप्रा सेवा की गतिविधि संचालित होती है। महाराजश्री ने बताया मंगलवार को उन्हें देवास में अपने शिष्य के यहां कार्यक्रम में जाना था, चालक अवकाश पर था इसलिए वे ही कार चलाकर देवास पहुंच गए।
कार्यक्रम से आश्रम लौटते वक्त बड़नगर रोड पर हनुमानगढ़ी के पास रात करीब 11.45 बजे चार युवकों ने उनके वाहन को रोकने का प्रयास किया। युवकों को देख कर लग गया था कि यह मदद मांगने के हिसाब से वाहन नहीं रुकवा रहे हैं, बल्कि किसी घटना को अंजाम देना चाहते हैं। इसलिए मैंने गाड़ी नहीं रोकी। इस पर युवकों ने पत्थरों से कार पर हमला कर दिया। आश्रम आकर पुलिस को घटना की जानकारी दी, इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
एसपी ने फोन पर बात की
ज्ञानदासजी महाराज ने बताया घटना के संबंध में पुलिस की कार्रवाई जारी है। एसपी प्रदीप शर्मा ने फोन पर बात कर कुशलक्षेम जाने तथा घटना के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। जल्द ही आरोपित पुलिस गिरफ्त में होंगे, ऐसा विश्वास है।
दो साल पहले आश्रम में हुआ था हमला
ज्ञानदास महाराज ने बताया समाज में मेरी भूमिका धर्म के प्रचार तथा शिप्रा मैया की सेवा पर केंद्रित है।
2021 से शिप्रा स्वच्छता के लिए आंदोलन कर रहे
- महामंडलेश्वर ज्ञानदासजी महाराज शिप्रा स्वच्छता को लेकर वर्ष 2021 से आंदोलन कर रह हैं। 16 नवंबर 2021 को उन्होंने शिप्रा को स्वच्छ व प्रवाहमान बनाने की मांग करते हुए अन्न का त्याग कर दिया था। उनका यह आंदोलन दो माह चला, सरकर के आश्वासन पर उन्होंने आंदोलन स्थगित कर दिया था।
- मांग पूरी नहीं होते देख उन्होंने 5 नवंबर 2022 को आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत की। इस बार उन्होंने शिप्रा मैया के लिए अन्न के साथ चरण पादुका का भी त्याग कर दिया। यह आंदोलन 5 जनवरी 2024 तक चला।