तीसरा जनसुविधा केंद्र (फेसिलिटी सेंटर) तय समय-सीमा समाप्त होने के एक वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका है। जिस परियोजना का लाभ जून-2025 से मिलने लगना था, व …और पढ़ें

HighLights
- जिस परियोजना का लाभ श्रद्धालुओं को जून-2025 से मिलने लगना था, वह जून-2026 में भी अधूरी पड़ी है
- यह सुविधा केंद्र सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल था
- तय समय-सीमा समाप्त होने के एक वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका है
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि बड़ा गणेश मंदिर के समीप निर्माणाधीन तीसरा जनसुविधा केंद्र (फेसिलिटी सेंटर) तय समय-सीमा समाप्त होने के एक वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका है। जिस परियोजना का लाभ श्रद्धालुओं को जून-2025 से मिलने लगना था, वह जून-2026 में भी अधूरी पड़ी है।
बता दें कि महाकाल मंदिर में लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के बीच यह सुविधा केंद्र सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल था। रुद्रसागर और हरसिद्धि क्षेत्र से आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को यहां वातानुकूलित प्रतीक्षालय, फूड कोर्ट, लड्डू प्रसाद काउंटर, टिकट काउंटर, जूता स्टैंड और आधुनिक सुविधाघर जैसी व्यवस्थाएं मिलनी थीं। दावा था कि इससे मुख्य मंदिर क्षेत्र पर भीड़ का दबाव कम होगा और दर्शन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित बनेगी। लेकिन निर्धारित समय गुजर जाने के बावजूद श्रद्धालु अब भी इन सुविधाओं से वंचित हैं।
जुलाई 2024 में धरातल पर इसका काम ठेकेदार ने शुरू किया था। अनुबंध अनुसार परियोजना जून 2025 तक पूरी हो जाना थी मगर ऐसा न हो सका। ताजा स्थिति ये है कि समय-सीमा बीतने के सालभर बाद भी काम 50 प्रतिशत ही हुआ है। प्रोजेक्ट कब पूरा होगा, अभी ये साफ नहीं किया गया है। कहा गया है कि भवन का सिविल कार्य शीघ्र पूरा कर विद्युतीकरण, एयर कूलिंग सिस्टम, लिफ्ट, फैसाड लाइटिंग और आंतरिक विकास जैसे महत्वपूर्ण कार्य शुरू किए जाएंगे।भवन को आकर्षक बनाने के लिए 4.23 करोड़ रुपये से स्टोन क्लैडिंग, थ्री-डी नक्काशी और सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
सबसे बड़ा प्रश्न- महाकाल परियोजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता प्राप्त तो फिर देरी क्यों
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब महाकाल क्षेत्र की परियोजनाओं को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता प्राप्त है, तब भी एक अपेक्षाकृत छोटी जनसुविधा परियोजना निर्धारित समय पर क्यों पूरी नहीं हो सकी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाई जा रही व्यवस्था खुद अव्यवस्था का शिकार नजर आ रही है। निर्माण अवधि समाप्त हुए लगभग एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियों की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है कि देरी के लिए आखिर जवाबदेह कौन है।
परियोजना की लागत 15 करोड़ थी अब है 21 करोड़
परियोजना की लागत भी बढ़ गई है। शुरुआत में लगभग 15 करोड़ रुपये की योजना अब 21 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। वजह, टाइमलाइन पर उठते सवालों से बचने के लिए नए काम जोड़ देना है। कुल मिलाकर कहे तो महाकाल लोक के बाद उज्जैन को विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने के दावे लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन तीसरे फेसिलिटी सेंटर जैसी बुनियादी सुविधा का वर्षों तक अधूरा रहना इन दावों पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। श्रद्धालुओं को सुविधा देने के लिए बनाई गई परियोजना अब देरी और प्रशासनिक सुस्ती की मिसाल बनती जा रही है।
सवाल जिनके जवाब जरूरी
- जून 2025 तक पूरा होना था, फिर देरी क्यों हुई।
- निर्माण एजेंसी पर क्या कार्रवाई हुई।
- श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलने में और कितना समय लगेगा।
- क्या इस वर्ष भी परियोजना पूरी हो पाएगी।
उज्जैन में कंठाल से लेकर गोपाल मंदिर तक महाकाल सवारी मार्ग पर लागू होगा ‘यूनिफॉर्म कलर कोड’