सड़क के एक हिस्से पर दर्जनों दोपहिया और चारपहिया वाहन कतारबद्ध खड़े थे, जबकि बचे हुए संकरे हिस्से से दोनों दिशाओं का ट्रैफिक निकालने की कोशिश हो रही थ…और पढ़ें

HighLights
- सड़क के एक हिस्से पर दर्जनों दोपहिया और चारपहिया वाहन कतारबद्ध खड़े थे
- बचे हुए संकरे हिस्से से दोनों दिशाओं का ट्रैफिक निकालने की कोशिश हो रही थी
- नतीजा यह रहा कि यहां तीन घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही और सैकड़ों लोग परेशान होते रहे
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। देवास रोड पर सोमवार को जो दृश्य दिखा, उसने फोरलेन परियोजना की जमीनी हकीकत उजागर कर दी। सड़क के एक हिस्से पर दर्जनों दोपहिया और चारपहिया वाहन कतारबद्ध खड़े थे, जबकि बचे हुए संकरे हिस्से से दोनों दिशाओं का ट्रैफिक निकालने की कोशिश हो रही थी। नतीजा यह रहा कि यहां तीन घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही और सैकड़ों लोग परेशान होते रहे।
फोरलेन निर्माण के चलते मार्ग के दूसरे हिस्से में डामरीकरण और बिजली कंपनी का काम चल रहा है। इसलिए फिलहाल इसी हिस्से से दोनों ओर का आवागमन संचालित किया जा रहा है। लेकिन जिस सड़क पर यातायात चलना चाहिए था, उसका बड़ा हिस्सा अवैध पार्किंग ने घेर रखा है। तस्वीर में साफ दिखाई देता है कि सड़क किनारे खड़े वाहन ट्रैफिक के लिए उपलब्ध जगह को लगातार कम कर रहे हैं।
देवास रोड पर युग मोटर्स के सामने सड़क के बड़े हिस्से पर खड़े वाहन। निर्माण कार्य के बीच अवैध पार्किंग ने ट्रैफिक को एक लेन में समेट दिया, जिससे घंटों जाम लगा रहा। (नईदुनिया प्रतिनिधि)
स्थानीय लोगों का कहना है कि कार शोरूम के पास आने वाले ग्राहकों और कर्मचारियों के वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं है। परिणामस्वरूप दोपहिया और चारपहिया वाहन सीधे मुख्य मार्ग पर ही खड़े किए जा रहे हैं। इसके अलावा आसपास लगने वाले फल, सब्जी और चाय-नाश्ते के ठेले भी सड़क की उपयोगी चौड़ाई कम कर रहे हैं। ऐसे में थोड़े से ट्रैफिक दबाव में भी वाहन रेंगने लगते हैं।
विडंबना यह है कि जिस देवास रोड पर वर्षों तक सिंगल लेन होने के कारण जाम की समस्या रही, उसी समस्या के समाधान के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर फोरलेन सड़क बना रही है। लेकिन सड़क चौड़ी होने के बावजूद यदि उसका हिस्सा पार्किंग और अतिक्रमण की भेंट चढ़ जाए तो विकास का उद्देश्य अधूरा ही रह जाएगा।
समस्या केवल देवास रोड तक सीमित नहीं
यह समस्या केवल देवास रोड तक सीमित नहीं है। फ्रीगंज क्षेत्र में भी कई बड़े अस्पताल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और संस्थान अपनी पार्किंग की जिम्मेदारी सड़क और फुटपाथ पर छोड़ चुके हैं। एसएस हास्पिटल सहित कई स्थानों पर सड़क किनारे खड़े वाहन आम दृश्य बन चुके हैं। पैदल चलने वालों के लिए बने फुटपाथ तक वाहनों और अतिक्रमण के कब्जे में हैं।
नगर निगम और यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल नगर निगम, यातायात पुलिस और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर है। जब करोड़ों रुपये की सड़क परियोजनाओं के साथ पार्किंग प्रबंधन और अतिक्रमण नियंत्रण की व्यवस्था नहीं होगी, तब जाम की समस्या खत्म होने के बजाय नए रूप में सामने आती रहेगी। जनता अब पूछ रही है कि यदि फोरलेन बनने के बाद भी सड़क पर चलने की जगह नहीं बचेगी तो फिर विकास कार्यों पर खर्च हुए करोड़ों रुपये का लाभ आखिर किसे मिलेगा।