Ujjain Land Dispute: सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में कई अहम परियोजनाएं जमीन और प्रशासनिक अड़चनों की वजह से शुरू नहीं हो पा रही हैं।

HighLights
- गोवर्धन सागर रिजुवनेशन परियोजना भूमि विवाद के कारण कोर्ट में अटकी
- कई सामुदायिक भवनों के लिए सरकारी जमीन नहीं मिल रही
- उज्जैन में कुछ प्रोजेक्ट स्थल बदलने और टेंडर प्रक्रिया में फंसे हैं
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर सरकार लगातार समयबद्ध विकास कार्यों का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के एजेंडे से सामने आया है कि जिले की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भूमि विवाद, सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने, स्थल परिवर्तन, प्रशासनिक मंजूरियों और टेंडर प्रक्रिया में फंसकर आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। यही कारण है कि करोड़ों रुपये की स्वीकृति मिलने के बावजूद अनेक योजनाएं अभी तक धरातल पर उतर ही नहीं सकी हैं।
एजेंडे के अनुसार, एक हजार लाख रुपये (10 करोड़ रुपये) की गोवर्धन सागर रिजुवनेशन परियोजना भूमि विवाद के कारण न्यायालय में लंबित है। विवाद के चलते निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इसी तरह कई सामुदायिक भवनों और अन्य सार्वजनिक निर्माण कार्यों के लिए शासकीय भूमि उपलब्ध नहीं होने से परियोजनाएं प्रारंभ नहीं हो सकी हैं।
कुछ परियोजनाओं को लेकर टेंडर जारी नहीं हुए
कुछ मामलों में स्थल परिवर्तन की प्रक्रिया चल रही है, जिससे काम लगातार टल रहे हैं। कई योजनाएं ऐसी भी हैं, जिनमें प्रशासनिक स्वीकृति और तकनीकी मंजूरियां मिलने के बाद भी टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है, जबकि कुछ परियोजनाओं में टेंडर जारी होने के बावजूद कार्य प्रारंभ नहीं हुआ। एजेंडे में संबंधित विभागों से इन सभी लंबित कार्यों की वर्तमान स्थिति, देरी के कारण और उन्हें शुरू करने की समय-सीमा का विस्तृत ब्योरा मांगा गया है।
स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2025-26 के लिए स्वीकृत 12.23 करोड़ रुपये के 45 कार्यों में से बड़ी संख्या में परियोजनाएं अभी शुरुआती स्तर पर हैं। कई कार्यों की भौतिक प्रगति शून्य से 10 प्रतिशत के बीच बताई गई है, जबकि कुछ कार्य अब तक शुरू भी नहीं हो सके हैं। ऐसे में स्वीकृति और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच का अंतर साफ दिखाई देता है।
वैकल्पिक व्यवस्था क्या की
दिशा बैठक में सांसद अनिल फिरोजिया ने संबंधित विभागों से यह भी पूछा है कि जिन परियोजनाओं में भूमि उपलब्ध नहीं है, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्या की गई है। जहां भूमि विवाद हैं, वहां समाधान की दिशा में क्या प्रयास हुए और जो कार्य स्थल परिवर्तन के कारण रुके हैं, उन्हें कब तक शुरू किया जाएगा। साथ ही टेंडर और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में हो रही देरी के लिए जिम्मेदार कारणों की भी जानकारी मांगी गई है।
सिंहस्थ के लिए दो साल से भी कम समय बचा
सिंहस्थ-2028 में अब दो साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में यदि अपेक्षाकृत छोटे विकास कार्य ही जमीन और प्रक्रियागत बाधाओं से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं तो महापर्व से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं की समय पर पूर्णता भी चुनौती बन सकती है। यही कारण है कि इस बार दिशा बैठक में परियोजनाओं की प्रगति से ज्यादा उनकी देरी के कारणों पर फोकस रहने की संभावना है।
प्रमुख अड़चनें
- भूमि विवाद में फंसी 10 करोड़ रुपये की गोवर्धन सागर रिजुवनेशन परियोजना।
- कई सामुदायिक भवन और सार्वजनिक निर्माण शासकीय भूमि के अभाव में लंबित।
- स्थल परिवर्तन के कारण अनेक परियोजनाएं शुरू नहीं हो सकीं।
- टेंडर और प्रशासनिक मंजूरियों में देरी से अटके विकास कार्य।
- 12.23 करोड़ रुपये के 45 स्वीकृत कार्यों में कई की प्रगति अब भी शून्य से 10 प्रतिशत के बीच।