डिजिटल डेस्क, उज्जैन। भारत हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है। वर्ष 1947 में इसी दिन देश ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आजादी के लिए 14 और 15 अगस्त में से किस तारीख को चुना जाए और स्वतंत्रता का औपचारिक कार्यक्रम किस समय हो, इसे लेकर भी विचार-विमर्श हुआ था।
आजादी की तारीख से जुड़ा यह प्रसंग मध्य प्रदेश के उज्जैन से भी जुड़ा है। बताया जाता है कि उज्जैन के प्रसिद्ध पंडित सूर्यनारायण व्यास ने ज्योतिषीय गणना के आधार पर भारत की स्वतंत्रता के लिए मुहूर्त निकाला था।
14 और 15 अगस्त में से एक तारीख चुनने की थी चुनौती
1946 में देश की आजादी तय होने के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अपने भरोसेमंद गोस्वामी गणेश दत्त महाराज के माध्यम से पंडित सूर्यनारायण व्यास को दिल्ली बुलाया था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ज्योतिष में गहरा विश्वास रखते थे। उन्हें बताया गया था कि अंग्रेजों से सत्ता हस्तांतरण के लिए 14 और 15 अगस्त की दो तारीखें उपलब्ध हैं।
इसके बाद पंडित व्यास से पूछा गया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार भारत को अपना पहला स्वतंत्रता दिवस किस दिन मनाना चाहिए। पंचांग देखने के बाद उन्होंने 15 अगस्त को उपयुक्त बताया। उनके अनुसार 14 अगस्त को कुंडली में लग्न यानी पहला स्थान अस्थिर था। इसलिए उन्होंने 15 अगस्त को स्वतंत्रता के लिए सर्वथा उपयुक्त बताया।
आधी रात का समय क्यों चुना गया?
पंडित सूर्यनारायण व्यास के पुत्र और दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक व लेखक राजशेखर व्यास ने इस प्रसंग से जुड़ी जानकारी दी थी। उनके अनुसार मुहूर्त निकालने के बाद पंडित व्यास ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद से कहा था कि आजादी का समय आधी रात का बन रहा है।
उन्होंने सुझाव दिया कि आधी रात को ध्वजारोहण और स्वतंत्रता का औपचारिक कार्यक्रम किया जाए तथा अन्य कार्यक्रम सुबह आयोजित किए जाएं। बताया जाता है कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उनकी सलाह मानते हुए आधी रात को लाल किले पर ध्वजारोहण किया। पंडित व्यास की सलाह पर रात में संसद भवन को धोकर उसका शुद्धिकरण भी किया गया था।
1930 में ही कर दी थी आजादी की भविष्यवाणी
पंडित सूर्यनारायण व्यास का जन्म 1902 में हुआ था। उनसे संबंधित पुस्तकों के अनुसार वह 1921 से ही स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय हो गए थे। बताया जाता है कि उन्होंने वर्ष 1930 में ही भविष्यवाणी कर दी थी कि भारत अगस्त 1947 में स्वतंत्र होगा और डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के राष्ट्रपति बनेंगे।
1952 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद का कार्यकाल समाप्त होने के समय पंडित व्यास ने फिर कहा था कि वह दूसरी बार भी राष्ट्रपति चुने जाएंगे। बाद में यह बात भी सच साबित हुई। इसके बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पंडित व्यास को पत्र लिखकर कथित तौर पर स्वीकार किया था कि उन्होंने जो कहा था, वही हुआ।
पाकिस्तान को लेकर भी की थी भविष्यवाणी
पंडित व्यास ने भारत की स्वतंत्रता का मुहूर्त निकालते समय पाकिस्तान के गठन को लेकर भी चेतावनी दी थी। बताया जाता है कि उन्होंने कहा था कि यदि 14 अगस्त को पाकिस्तान बना तो वह हमेशा अस्थिर रहेगा। इसके पीछे उन्होंने उस दिन मेष लग्न और गुरु की शत्रु स्थान पर स्थिति को कारण बताया था। मोहम्मद अली जिन्ना पंचांग और मुहूर्त को नहीं मानते थे। इसलिए पाकिस्तान की आजादी के लिए 14 अगस्त की तारीख चुनी गई।
पंडित व्यास से जुड़ी जानकारी में यह भी बताया जाता है कि जिन्ना की पत्नी रतनबाई पंडित व्यास को मानती थीं, लेकिन 1929 में ही उनका निधन हो गया था। इस तरह भारत की आजादी की तारीख और समय से जुड़ा यह प्रसंग मध्य प्रदेश के उज्जैन के पंडित सूर्यनारायण व्यास के नाम से जुड़ा हुआ है।

