मध्यप्रदेश में मेट्रो नेटवर्क विस्तार के तहत उज्जैन-इंदौर-पीथमपुर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट की संशोधित डीपीआर करीब 25 हजार करोड़ रुपये की तैयार कर ली गई है…और पढ़ें

HighLights
- संशोधित डीपीआर करीब 25 हजार करोड़ रुपये की तैयार कर ली गई है
- इसे अब कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है
- योजना अब केवल उज्जैन-इंदौर कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : मध्यप्रदेश में मेट्रो नेटवर्क विस्तार के तहत उज्जैन-इंदौर-पीथमपुर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट की संशोधित डीपीआर करीब 25 हजार करोड़ रुपये की तैयार कर ली गई है। इसे अब कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है।
मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के एमडी एस. कृष्णा चैतन्य ने ‘नईदुनिया’ से चर्चा में यह जानकारी दी। इस संशोधित प्रस्ताव के साथ उज्जैन मेट्रो का दायरा भी बड़ा हो गया है। योजना अब केवल उज्जैन-इंदौर कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है, बल्कि पीथमपुर तक मेट्रो नेटवर्क विकसित करने का प्लान भी इसमें शामिल है। इससे प्रदेश के मालवा क्षेत्र के तीन प्रमुख शहरों को एक ही मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ेगा।
महाकाल से इंदौर तक करीब 45 किमी पहला चरण
प्रोजेक्ट के पहले चरण में उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर/नानाखेड़ा क्षेत्र से इंदौर के लवकुश चौराहा-सुपर कॉरिडोर तक करीब 45 किलोमीटर का कॉरिडोर प्रस्तावित है। डीएमआरसी द्वारा तैयार शुरुआती डीपीआर में 11 स्टेशन प्रस्तावित किए गए थे। हालांकि अंतिम अप्रूवल से पहले रूट, स्टेशन और अलाइनमेंट में बदलाव हो सकते हैं। उज्जैन शहर में मेट्रो के कुछ हिस्से को अंडरग्राउंड करने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। इसका फैसला ट्रैफिक, यात्रियों की संख्या, जमीन और तकनीकी जरूरतों के आधार पर होगा।
10 हजार करोड़ से बढ़कर 25 हजार करोड़ तक पहुंचा दायरा
प्रोजेक्ट के शुरुआती दौर में करीब 10 हजार करोड़ रुपये की लागत को लेकर चर्चा थी। बाद में योजना का दायरा बढ़ा और उज्जैन-इंदौर के साथ पीथमपुर को जोड़ने का प्रस्ताव सामने आया। अब संशोधित डीपीआर में 25 हजार करोड़ रुपये की लागत प्रस्तावित की गई है। हालांकि यह अभी प्रस्तावित लागत है। कैबिनेट अप्रूवल के बाद ही प्रोजेक्ट की अंतिम लागत, फंडिंग और निर्माण का अगला रोडमैप स्पष्ट होगा।
सिंहस्थ 2028 के लक्ष्य के सामने अब असली चुनौती
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जून 2024 में सिंहस्थ 2028 से पहले इंदौर और उज्जैन के बीच मेट्रो कनेक्टिविटी का लक्ष्य सामने रखा था। इसके बाद डीएमआरसी को डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक पहले चरण की ड्राफ्ट डीपीआर भी जमा हो चुकी है। अब संशोधित डीपीआर के कैबिनेट तक पहुंचने के बाद प्रोजेक्ट निर्णायक चरण में प्रवेश करेगा। लेकिन कैबिनेट अप्रूवल के बाद फंडिंग, टेंडर, जमीन, निर्माण और ट्रायल की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ऐसे में सिंहस्थ से पहले मेट्रो का संचालन संभव होगा या नहीं, यह इन प्रक्रियाओं की रफ्तार पर निर्भर करेगा।
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