कुलदीप भावसार, नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद शहर में अवैध होर्डिंग्स की आंधी रुकने का नाम नहीं ले रही। हालत ये है कि शहर के कई प्रमुख चौराहों पर अवैध होर्डिंग सीना ताने खड़े हैं। ये न सिर्फ यातायात बाधित कर रहे हैं, बल्कि हादसों का न्योता भी दे रहे हैं। हाई कोर्ट अवैध और खतरनाक होर्डिंग, पोस्टर, बैनर को लेकर कई बार नाराजगी जता चुकी है।
इसके बाद एक्शन में आए निगम ने कुछ जगह कार्रवाई कर फ्लैक्स, बैनर हटाए भी, लेकिन ढांचे आज भी जस के तस खड़े हैं। शहर के कई प्रमुख चौराहों पर अवैध पोस्टर, बैनर लगे हैं और जिम्मेदारों से पूछ रहे हैं कि उन्हें कब हटाया जाएगा। रविवार को नईदुनिया की टीम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर वास्तविकता जानी। मरीमाता चौराहा, महू नाका चौराहा सहित कई चौराहे हैं जहां स्थिति अब भी नहीं सुधरी है।
मरीमाता चौराहा
पुलिस पेट्रोल पंप से लेकर मरीमाता चौराहे के आगे तक अवैध होर्डिंग लगे थे। विरोध के बाद नगर निगम ने पोस्टर बैनर तो हटा दिए, लेकिन पाइप और बांस के ढांचे, गेट आज भी खड़े हैं। लगभग यही स्थिति चौराहे पर लगे यातायात सिग्नल की है। इसे पूरी तरह से बांस की बल्लियां और पाइप से ढांक दिया गया है। मालवा मिल चौराहा पर बड़े-बड़े फ्लैक्स और होर्डिंग टंगे हैं।
जन्माष्टमी, चतुर्थी बीती, लेकिन पोस्टर-बैनर कायम
कबीटखेड़ी, जय अंबे नगर मेन रोड, सुखलिया में गणेश विसर्जन के पोस्टर सड़क किनारे व पेड़ पर लगे हैं। मित्र मंडलों के अवैध पोस्टर, बैनर मुंह चिढ़ा रहे हैं। राजनीतिक रूतबा दिखाने के लिए इन पोस्टर, बैनरों पर आयोजकों ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक रमेश मेंदोला, प्रभारी महापौर राजेंद्र राठौर का फोटो भी लगा रखा है। विजय नगर मेन रोड पर कृष्णा दूध डेयरी के पास बने मंदिर की दीवार पर कृष्ण जन्माष्टमी का पोस्टर लगा है। क्षेत्र में निगम के कई अधिकारी रहते हैं। वे दिन-रात यहां से गुजरते हैं, बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
होर्डिंग गिरने से हो चुका है हादसा
अवैध होर्डिंग की वजह से शहर में कई हादसे हो चुके हैं। पिछले दिनों पाटनीपुरा चौराहा पर लगे अवैध होर्डिंग गिरने से एक युवक घायल भी हो चुका है। इसके बावजूद न होर्डिंग लगाने वालों पर कार्रवाई हुई न आयोजकों पर।
अवैध पोस्टर, बैनर, होर्डिंग को लेकर कोर्ट का आदेश
हाई कोर्ट में एक एडवरटाइजिंग एजेंसी ने याचिका प्रस्तुत कर कहा था कि वे नगर निगम को निर्धारित शुल्क और भारी राजस्व का भुगतान कर विधिवत अनुमति प्राप्त यूनिपोल, लालीपाप और अन्य आउटडोर विज्ञापन स्ट्रक्चर संचालित करते हैं, लेकिन विभिन्न अवसरों पर इन स्ट्रक्चर पर बिना अनुमति राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर लगा दिए जाते हैं।
इससे स्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचता है। कोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए आदेश दिया था कि अवैध विज्ञापन, होर्डिंग लगाने वालों के विरुद्ध आउटडोर मीडिया रूल्स 2017 के प्रविधानों के तहत कार्रवाई की जाए।
ये हैं अवैध पोस्टर, बैनर, होर्डिंग की परिभाषा
- खंभों, पेड़ों या डिवाइडरों पर बिना अनुमति टांगे गए फ्लैक्स।
- पोस्टर और कटआउट, रजिस्टर्ड चार्टर्ड/स्ट्रक्चरल इंजीनियर के सुरक्षा प्रमाण-पत्र के बिना लगाए गए स्ट्रक्चर।
- ऐतिहासिक धरोहरों, राजभवन, हाई कोर्ट और धार्मिक स्थलों के प्रतिबंधित दायरे में लगे स्ट्रक्चर।
- ट्रैफिक सिग्नल, चौराहे या संवेदनशील मोड़ के पास लगी तेज रोशनी या झिलमिलाती स्क्रीन।
- ट्रैफिक लाइट, रोड साइन बोर्ड या दिशा-सूचक बोर्ड छिपाने वाले स्ट्रक्चर
- फुटपाथ, सर्विस रोड या रोड डिवाइडर पर पैदल यात्रियों का रास्ता रोककर लगाए यूनिपोल व बोर्ड।
- निर्धारित आकार से बड़े फ्रेम या हवा के दबाव/वजन के मानकों का उल्लंघन करने वाले स्ट्रक्चर।
- बिना अनुमति और तय प्रक्रिया का पालन किए बिना लगाए गए स्ट्रक्चर शामिल हैं।
निगमायुक्त क्षितिज सिंघल से सीधी बात
सवाल – शहर में कई जगह अवैध होर्डिंग, पोस्टर, बैनर लगे हैं। कार्रवाई नहीं होती?
जवाब – रिमूवल टीम कार्रवाई करती है।
सवाल – हाई कोर्ट ने अवैध होर्डिंग लगाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए कहा है।
जवाब – हमारी टीमें लगातार कार्रवाई करती हैं। कई बार पुलिस सपोर्ट नहीं मिलता। कार्रवाई बाधित होती है।
सवाल – आपकी तरफ से क्या कार्रवाई की जाएगी?
जवाब – रिमूवल टीम को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस पर निगरानी रखेंगे।
इस बारे में और सख्ती करेंगे
जिला प्रशासन और नगर निगम के समन्वय से अवैध होर्डिंग, पोस्टर, बैनर के विरुद्ध सतत कार्रवाई की जाती है। अवैध पोस्टर, बैनर, होर्डिंग शहर के यातायात को तो बिगाड़ते ही हैं, साथ ही इनकी वजह से दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। अवैध पोस्टर, बैनर, होर्डिंग हटने ही चाहिए। इस बारे में और सख्ती करेंगे। – शिवम वर्मा, कलेक्टर, इंदौर
हाई कोर्ट ने दिए थे निर्देश
मार्च 2026 में हाई कोर्ट ने निर्देश देते हुए इंदौर नगर निगम कमिश्नर को यह पता लगाने के लिए कहा था कि नियमों के विरुद्ध सड़क के डिवाइडर और फुटपाथ पर कौन-से होर्डिंग्स लगाए गए हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि प्रशासनिक लापरवाही और अनदेखी के कारण नियमों के प्रावधानों को अर्थहीन नहीं बनाया जा सकता।
जुलाई 2026 में हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शहर में अवैध राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर-होर्डिंग के मामलों में कड़ा रुख अपनाते हुए 24 घंटे के भीतर अवैध होर्डिंग हटाने के निर्देश दिए थे।
प्रमुख मार्गों पर अवैध होर्डिंग-बैनर और पोस्टर
महू नाका चौराहा, अन्नपूर्णा रोड और जवाहर मार्ग पर अवैध होर्डिंग, बैनर और पोस्टर नजर आ रहे हैं, मगर नगर निगम आयोजकों पर कार्रवाई नहीं कर रहा है। दशहरा मैदान के सामने और रणजीत हनुमान मंदिर के पास गरबा महोत्सव के अवैध पोस्टर लगे हुए हैं। महू नाका चौराहे पर यातायात पुलिस और पुलिस के आला अधिकारियों के कार्यालयों के पास ही दुकानों के ऊपर अवैध होर्डिंग लगे हैं।
इन दुकानों पर सुबह से रात तक ग्राहकों का आना-जाना लगा रहता है। इनके गिरने से किसी भी ग्राहक को गंभीर चोट लग सकती है। वहीं, जवाहर मार्ग पर कई स्थानों पर अवैध बैनर-पोस्टर लगे हुए हैं। बंबई बाजार, मोहनपुरा से लेकर तारकेश्वर महादेव मंदिर तक दुकानों के दोनों तरफ नजर आ रहे हैं। जवाहर मार्ग से सुबह से रात तक हजारों वाहनों का आवागमन होता है। इनके गिरने के कारण कोई भी वाहन चालक गंभीर हादसे का शिकार हो सकता है। जान भी जा सकती है।
