महाकाल महालोक के दूसरे चरण में 57 करोड़ रुपये से 99 पाषाण और कांस्य मूर्तियां स्थापित होंगी। सिंहस्थ-2028 से पहले परियोजना पूरी कर इसे विश्वस्तरीय आध्…और पढ़ें

HighLights
- महाकाल महालोक में 99 नई पाषाण और कांस्य मूर्तियां लगेंगी।
- 57 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना का विस्तार होगा।
- सिंहस्थ-2028 से पहले निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य।
धीरज गोमे, नईदुनिया, उज्जैन। महाकाल महालोक अब अपने दूसरे और सबसे भव्य चरण में प्रवेश कर चुका है। सिंहस्थ-2028 से पहले यहां 57 करोड़ रुपये की लागत से 99 नई पाषाण और कांस्य मूर्तियां स्थापित की जाएंगी, जिनमें शिवपुराण के प्रमुख प्रसंगों को शास्त्र सम्मत और स्थायी स्वरूप दिया जाएगा।
मई 2023 में आंधी से क्षतिग्रस्त हुई एफआरपी (फाइबर रिइन्फोर्स्ड प्लास्टिक) मूर्तियों के स्थान पर लगने वाली इन विशाल मूर्तियों के निर्माण में देशभर के करीब 300 शिल्पकार, मूर्तिकार, डिजाइनर और तकनीकी विशेषज्ञ जुटेंगे। परियोजना पूरी होने के बाद महाकाल महालोक केवल दर्शन का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि भारतीय शिल्प, आस्था और सनातन परंपरा का विश्वस्तरीय ओपन एयर म्यूजियम बनकर उभरेगा।
एक साथ शुरू होगा मूर्ति का निर्माण
राज्य पर्यटन विकास निगम (एमपीएसटीडीसी) द्वारा अनुबंधित नोएडा की यूनिक एडवेंचर कंसोर्टियम कंपनी ने उज्जैन, जयपुर, ग्वालियर और नोएडा में निर्माण कार्यशालाएं तैयार कर ली हैं। समयसीमा को देखते हुए चारों शहरों में एक साथ मूर्ति निर्माण शुरू किया जा रहा है। शासन 30 मूर्तियों के स्केच को स्वीकृति दे चुका है और इनके आधार पर प्रारंभिक मॉडल तैयार किए जा रहे हैं। इसके बाद पारंपरिक शिल्पकला और आधुनिक तकनीक के समन्वय से अंतिम निर्माण किया जाएगा।
विशेषज्ञों की मंजूरी के बाद होगा अंतिम निर्माण
इन मूर्तियों के माध्यम से शिवपुराण के विभिन्न प्रसंगों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि श्रद्धालु और पर्यटक दर्शन के साथ भारतीय संस्कृति, पौराणिक परंपरा और शिल्पकला का भी अनुभव कर सकें। परियोजना में मूर्तियों की स्थापना के साथ पेडेस्टल निर्माण और अत्याधुनिक फसाड लाइटिंग भी शामिल है।
हर मूर्ति का पहले क्ले माडल तैयार किया जाएगा। विशेषज्ञ समिति की स्वीकृति मिलने के बाद ही अंतिम मूर्ति का निर्माण शुरू होगा। बड़ी मूर्तियों की संरचनात्मक मजबूती की जांच आईआईटी या समकक्ष तकनीकी संस्थान से कराना भी अनिवार्य रखा गया है, ताकि उनकी गुणवत्ता और दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
2023 की घटना के बाद लिया गया स्थायी निर्माण का निर्णय
मई 2023 में आई तेज आंधी में महाकाल महालोक की कुछ एफआरपी मूर्तियां क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इसके बाद सरकार ने स्थायी पाषाण और कांस्य मूर्तियां स्थापित करने का निर्णय लिया। अक्टूबर 2024 में इस परियोजना को मंजूरी मिली और अब इसका निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। लक्ष्य है कि सिंहस्थ-2028 से पहले महाकाल महालोक को ऐसा दिव्य, टिकाऊ और कलात्मक स्वरूप दिया जाए, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी भारतीय आस्था, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन सके।
महाकाल महालोक की नई भव्यता
- 99 नई मूर्तियां होंगी स्थापित।
- 42 मूर्तियां बंसी पहाड़पुर सैंडस्टोन से बनेंगी।
- 57 मूर्तियां कांस्य मिश्र धातु से तैयार होंगी।
- 8 से 35 फीट तक होगी मूर्तियों की ऊंचाई।
- 35 फीट ऊंची समुद्र मंथन प्रसंग पर आधारित महादेव प्रतिमा होगी सबसे बड़ी।
- 12 देव और असुरों की मूर्तियां समुद्र मंथन दृश्य का हिस्सा होंगी।
- 32 फीट ऊंची होगी यम संहार प्रतिमा।
- 30 फीट ऊंची होगी रावण प्रतिमा।
- 22 फीट ऊंची होगी पंचमुखी हनुमान प्रतिमा।
- 20 फीट ऊंची होगी श्रीगणेश प्रतिमा।
- 15 फीट ऊंची होगी काल भैरव प्रतिमा।
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