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शुद्ध होगा शिप्रा का जल, कान्ह नदी को 100 मीटर गहरी टनल के जरिए गंभीर में छोड़ने की परियोजना का 70% काम हुआ पूरा


919 करोड़ रुपये की कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना से कान्ह का पानी शिप्रा में मिलने की बजाय पाइप से सीधे गंभीर डैम तक जाएगा। …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 15 Jun 2026 09:41:18 AM (IST)Updated Date: Mon, 15 Jun 2026 09:43:21 AM (IST)

शुद्ध होगा शिप्रा का जल, कान्ह नदी को 100 मीटर गहरी टनल के जरिए गंभीर में छोड़ने की परियोजना का 70% काम हुआ पूरा

HighLights

  1. जमीन से 100 मीटर नीचे 12 किमी सुरंग का 70% काम पूरा
  2. हैदराबाद विशेषज्ञों की देखरेख में 2027 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य
  3. जमालपुरा स्टापडैम से 30.15 किमी दूर सिंगवाड़ा में पानी छोड़ा जाएगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। भक्तों के दिल में जितनी आस्था उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग को लेकर है उतनी ही यहां बहने वाली मोक्षदायिनी शिप्रा नदी को लेकर भी है। कान्ह नदी का पानी इसमें मिलने से शिप्रा लगातार दूषित होती रही, इससे यहां आने वाले भक्त भी नदी की हालत देख दुखी होते थे। लेकिन अब जल्द ही कान्ह नदी का पानी शिप्रा में मिलने की जगह पाइप के सहारे सीधे गंभीर डैम तक पहुंचेगा।

जमीन के 100 मीटर नीचे एक सुरंग बनाई जा रही है, इसका 70 प्रतिशत काम पूरा भी हो गया है। कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना पर 919 करोड़ रुपये आएगा, जिसका काम सिंहस्थ से पहले 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हैदराबाद के विशेषज्ञों की टीम के दिशा-निर्देशों में यह काम किया जा रहा है।

सिंगवाड़ा में छोड़ा जाएगा पानी

इस योजना में त्रिवेणी घाट के पास जमालपुरा गांव में स्टापडैम बनाकर कान्ह नदी का पानी रोककर इसे 30.15 किमी दूर गंभीर नदी में बने डैम में सिंगवाड़ा में यह पानी छोड़ा जाएगा। कान्ह का पानी डायवर्ट करने के लिए करीब 12 किमी के हिस्से में 5 मीटर से ज्यादा व्यास की टनल भी बनाई जा रही है।

सीमेंट की बाक्सनुमा लाइन

इसके साथ ही 18.5 मीटर लंबी डी आकर की सीमेंट की बाक्स जैसी पाइपलाइन भी बिछाई जा रही है। कान्ह नदी के शुरुआती और आखिरी छोर पर 140-140 मीटर की ओपन चैनल भी बनाया जा रहा है। कान्ह नदी का पानी सिंगवाड़ा से असलोदा, तुम्बावड़ा, सुर्जखेड़ी, गुधा, रूपाखेड़ी, कनार्वद, सर्वाना उन्हेल होकर बरखेड़ा मदन गांव में मेलेश्वर महादेव मंदिर के समीप शिप्रा नदी में जाकर मिलेगा।

जानकारों के अनुसार इस परियोजना को इंदौर, सांवेर की 2052 की आबादी को ध्यान में रखकर बनाया गया है। सिंहस्थ 2028 के पहले इसके शुरू होने से शिप्रा शुद्ध जल में श्रद्धालु स्नान कर सकेंगे।



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