उज्जैन के महाकाल मंदिर में तीन मार्च को तड़के चार बजे भस्म आरती में रंग उत्सव उत्सव मनाया जाएगा। पुजारी भगवान महाकाल को एक किलो गुलाल अर्पित करेंगे। …और पढ़ें
HighLights
- महाकाल मंदिर में पुजारी, पुरोहित, सेवक तथा भक्तों के होली खेलने पर प्रतिबंध रहेगा
- कोई भी व्यक्ति मंदिर में रंग और होली खेलने के अन्य उपकरण लेकर प्रवेश नहीं कर पाएगा
- उज्जैन के पुराने शहर सिंहपुरी में गाय के गोबर से बने पांच हजार कंडों से होली बनाई जाएगी
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में आज शाम संध्या आरती के बाद होलिका का दहन होगा। मंगलवार को तड़के चार बजे भस्म आरती में रंगोत्सव मनाया जाएगा। भगवान महाकाल हर्बल गुलाल से होली खेलेंगे। मंदिर की परंपरा के अनुसार, इस धुलेंडी पर मंदिर में प्रतिदिन होने वाली सभी पांच आरती में भगवान को गुलाल अर्पित किया जाएगा।
संध्या आरती में भगवान महाकाल को शकर से बनी माला धारण कराई जाएगी। इसके बाद पुजारी भगवान महाकाल को गुलाल अर्पित कर आरती करेंगे। आरती संपन्न होने के बाद मंदिर परिसर में ओंकारेश्वर मंदिर के सामने बनाई गई होलिका का विधिवत पूजन होगा। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ होलिका का दहन किया जाएगा।
महाकाल मंदिर में होली खेलने पर प्रतिबंध
तीन मार्च को तड़के चार बजे भस्म आरती में होली उत्सव मनाया जाएगा। पुजारी भगवान महाकाल को एक किलो गुलाल अर्पित करेंगे। मंदिर में पुजारी, पुरोहित, सेवक तथा भक्तों के होली खेलने पर प्रतिबंध रहेगा। कोई भी व्यक्ति मंदिर में रंग, गुलाल तथा होली खेलने के अन्य उपकरण लेकर प्रवेश नहीं कर पाएगा। प्रवेश द्वारों पर जांच पड़ताल के उपरांत ही मंदिर में प्रवेश मिलेगा।
सिंहपुरी में बनेगी पांच हजार कंडों की हर्बल होली
उज्जैन के पुराने शहर सिंहपुरी में गाय के गोबर से बने पांच हजार कंडों से होली बनाई जाएगी। दो हजार साल पुराने इस होली उत्सव में लकड़ी का बिलकुल भी उपयोग नहीं होगा। मध्य में प्रहलाद के रूप में केसरिया ध्वज लगाया जाएगा। होलिका का पूजन चार वेद के ब्राह्मण चार वेद के मंत्रों से करेंगे। शहर में करीब 250 स्थानों पर होली बनाई जाएगी।

