Site icon Mahakal Mandir News

महंत रविंद्रपुरी ने कहा- लाल कपड़े पहनने से कोई संत नहीं होता


अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने कहा कि उज्जैन में आपने लाल, काले, नीले कपड़े पहनकर घूमने वाले कालनेमी देखे होंगे। इनमें कौन कहां से आया है, क …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 16 Mar 2026 07:39:46 AM (IST)Updated Date: Mon, 16 Mar 2026 07:45:11 AM (IST)

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी। – फाइल फोटो

HighLights

  1. नईदुनिया से चर्चा में बोले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविंद्रपुरी
  2. गृहस्थ साधुओं को महामंडलेश्वर बनाने पर कहा- कुछ मामलों में कंप्रोमाइज करना पड़ता है
  3. उत्तराखंड में इस प्रकार का अभियान चलाया था इसमें कई फर्जी बाबा पकड़े गए थे

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ से पहले कालनेमी अभियान चलाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां संत परंपरा से होते हैं, लाल, काले, पीले, नीले कपड़े पहनकर घूमने वाले नहीं। ऐसे लोगों में कई बांग्लादेशी घुसपैठिए हो सकते हैं, इनकी जांच जरूरी है। गृहस्थ साधुओं को महामंडलेश्वर बनाने के सवाल पर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने कहा कि कुछ मामलों में कंप्रोमाइज करना पड़ता है।

सिंहस्थ महाकुंभ से पहले उज्जैन साधु संतों के विवाद का ‘अखाड़ा’ बना हुआ है। आए दिन साधु संतों के विवाद सामने आ रहे हैं। कुछ दिन पहले स्थानीय अखाड़ा परिषद में भी दो फाड़ हो चुकी है। नया विवाद महामंडलेश्वर स्वामी शांतिस्वरूपानंद के खिलाफ चारित्रिक षड्यंत्र रचने को लेकर सुर्खियों में है। लगातार इस प्रकार के मामले सामने आने के बाद सनातनी हिंदुओं की धार्मिक भावना आहत हो रही हैं।

मामले में नईदुनिया ने अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी से चर्चा की। उन्होंने बड़ी ही साफगोई से सभी विषयों पर अपनी राय रखी, उनकी चिंता सनातन व देश की रक्षा तथा आखाड़ों की सुचिता दोनों को लेकर थी। एक तरह उन्होंने सनातन धर्म व देश की रक्षा के लिए छदम वेशधारी घुसपैठियों पर नियंत्रण की बात कही, वहीं दूसरी ओर अखाड़ों की मान मार्यादा बनाए रखने के लिए साधु संतों पर कार्रवाई की अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराया।

बंगालादेशी घुसपैठियों को पकड़ेंगे

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने कहा कि उज्जैन में आपने लाल, काले, नीले कपड़े पहनकर घूमने वाले कालनेमी देखे होंगे। यह मुंडों की माला धारण कर लेंगे, शरीर पर भस्म लपेट लेंगे। इनमें कौन कहां से आया है, कई बांग्लादेशी हैं। इनके आधार कार्ड, संस्था का प्रमाण देखना जरूरी है। हमने उत्तराखंड में इस प्रकार का अभियान चलाया था इसमें कई फर्जी बाबा पकड़े गए थे।

गृहस्थ संत को महामंडलेश्वर बनाने पर यह कहा

  • जहां कोई सनातनी आश्रम संचालित करता है और शिष्य नहीं बना पाता वहां किसी को जिम्मेदारी देना आवश्यक है। इसलिए हमने मौनी बाबा आश्रम में स्वामी सुमनानंद को महामंडलेश्वर बनाया है। वे नित्य जप, तप अनुष्ठान करते हैं और संत व अखाड़े की परंपरा का पालन कर रहे हैं।
  • भगवान बापू का मुझे पता नहीं था कि वे गृहस्थ हैं, इसलिए महामंडलेश्वर बना दिया। बाद में पता चलने पर उन्होंने शपथ ली कि गृहस्थ जीवन से उनका कोई लेना देना नहीं है। वे आश्रम चलाते हैं और जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाते हैं। कुछ मामलों में कंप्रोमाइज करना पड़ता है।

संत बनकर शादी करते सिर्फ इन्हें देखा है…

संत अवधेशपुरी महाराज ने विवाह कर लिया इस सवाल पर रविंद्रपुरी ने कहा कि शादी करने के बाद संत बनते हुए तो मैंने कई को देखा है, लेकिन संत बनकर शादी करते हुए सिर्फ इन्हीं को देखा है। साधु संतों को इस प्रकार का आचरण शोभा नहीं देता है।

सनातन के नाम पर चंदा करने वाले दोषी

विवाह के बाद संत बनना और धर्मनिष्ठ आचरण के साथ सनातन की सेवा करने में कोई परेशानी नहीं है। सनातन के नाम पर चंदा करके उस रुपये से पत्नी बच्चों को पालना गलत है, मेरा बयान इसी परिपेक्ष में था। हमारे यहां ऋषि परंपरा है और ऋषि पत्नियों को गुरुमाता के रूप में पूजा जाता है।



Source link

Exit mobile version