ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से श्रावण मास में सोमवार को भगवान महाकाल की दूसरी सवारी निकली। अवंतिकानाथ चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर तथा सुमा हाथी पर …और पढ़ें

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से श्रावण मास में सोमवार को भगवान महाकाल की दूसरी सवारी निकली। अवंतिकानाथ चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर तथा सुमा हाथी पर मनमहेश रूप में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले। सावन की रिमझिम फुहारों के बीच लोक नृत्य की थीम पर निकली सवारी में लोकसंस्कृति के रंग भी नजर आए।
बीमार श्यामू की जगह पहली बार शामिल हुई मादा हाथी सुमा
पहली बार सवारी में शामिल हुई मादा हाथी सुमा शांत, किन्तु आह्लादित भाव से इठलाते हुए चल रही थी। दरअसल बीते दस सालों से सवारी में शामिल होने वाले श्यामू हाथी के बीमार होने पर इस बार मादा हाथी सुमा को सवारी में शामिल किया गया है। पशु चिकित्सा व वन विभाग ने ऐन वक्त पर सुमा को सवारी में शामिल करने का निर्णय लिया। इसकी खबर श्यामू हाथी के मालिक सरमन गिरि महाराज तक नहीं पहुंच पाई।
वे सोमवार सुबह श्यामू को लेकर मंदिर पहुंच गए, वहां पहले से मौजूद वन विभाग के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि इस बार सवारी में श्यामू नहीं, सुमा शामिल होगी। इसके बाद सरमन और श्यामू दोनों मायूस होकर घर लौट गए। इसके साथ ही रामू-श्यामू हाथी परिवार की 46 साल से चली आ रही भगवान महाकाल की सेवा का सफर भी समाप्त हो गया है।
कलेक्टर ने किया पूजन, शिप्रा तट पर हुआ जलाभिषेक
नगर भ्रमण पर निकले राजाधिराज दोपहर 3:30 बजे मंदिर के सभा मंडप में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने भगवान महाकाल के रजत मुखारविंदों का पूजन कर सवारी को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया। परंपरागत मार्गों से सवारी शाम करीब 5:10 बजे शिप्रा तट पहुंची। यहां पुजारियों ने भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना की। पूजन पश्चात सवारी निर्धारित मार्गों से शाम 7 बजे मंदिर पहुंची।