एक साध्वी व उसके सहयोगी द्वारा एक माहमंडलेश्वर को दुष्कर्म के आरोप में फंसाने का प्रयास करना संतों की मर्यादा पर सवाल खड़े कर रहा है। …और पढ़ें
HighLights
- सिंहस्थ में आने वाले साधु संतों के पास आधार कार्ड तथा संबंधित अखाड़े का पहचान पत्र होना अनिवार्य
- संतों का वेश धारण कर लोगों को भ्रमित करने वालों के खिलाफी कानूनी कार्रवाई की जाएगी
- देशभर में संतों से जुड़े ऐसे मामले समाने आ रहे हैं, जो हिन्दुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाले हैं
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। अब अखाड़ों में साधु संत के रूप में वहीं व्यक्ति रहेगा जो शुचिता का पालन करते हुए सनातन धर्म तथा अखाड़ों की परंपरा का पालन करेगा। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने कथित साधु संतों के खिलाफ कालनेमि अभियान चालने की घोषणा की है। अखाड़ा परिषद् अध्यक्ष ने कहा कि साधु संतों का काम जप, तप अनुष्ठान करना है, बीवी बच्चे पालना नहीं। जो साधु संत ऐसा कर रहे हैं उन्हें अखाड़ों से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
सनतान धर्म परंपरा में साधु संतों को भगवान का दूसरा रूप माना जाता हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से देशभर में संतों से जुड़े ऐसे मामले समाने आ रहे हैं, जो हिन्दुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाले हैं। चार पांच दिन से उज्जैन में भी भगवा की छिछालेदर हो रही है। एक साध्वी व उसके सहयोगी द्वारा एक माहमंडलेश्वर को दुष्कर्म के आरोप में फंसाने का प्रयास करना संतों की मर्यादा पर सवाल खड़े कर रहा है।
शुक्रवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरीजी महाराज ने महाराज ने साधु संतों के खिलाफ कालनेमि अभियान चलाने की घोषणा कर के यह बता दिया कि, संत समाज में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। सिंहस्थ से पहले वें भगवा के सम्मान की रक्षा के लिए कालनेमी अभियान के रूप में समुद्र मंथन की तैयारी कर रहे हैं।
आधार और अखाड़े का कार्ड होना अनिवार्य
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने कहा कि सिंहस्थ में आने वाले साधु संतों के पास आधार कार्ड तथा संबंधित अखाड़े का पहचान पत्र होना अनिवार्य है। बिना पहचान वाले भगवाधारी लोगों की जांच की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि संतों का वेश धारण कर लोगों को भ्रमित करने वालों के खिलाफी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें जेल भेजा जाएगा।

