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उज्जैन में 40 डिग्री तापमान की भीषण गर्मी के बीच धूनी ताप रहे अघोरी बाबा


भीषण गर्मी के बीच दो अलग- अलग रंग देखने को मिले। जहां एक ओर एक अघोरी धूनी साधना करते दिखे तो वहीं दूसरी ओर एक वानर अपनी प्यास बुझाने नल के पास पहुंचा। …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 03 May 2026 10:36:09 AM (IST)Updated Date: Sun, 03 May 2026 10:36:09 AM (IST)

उज्जैन में 40 डिग्री तापमान की भीषण गर्मी के बीच धूनी ताप रहे अघोरी बाबा
भीषण गर्मी के बीच तस्वीरों में दिखे दो अलग रंग। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. भीषण गर्मी के दौर में दिखे दो अलग रंग
  2. तपती दोपहर में यहां एक अघोरी धूनी साधना करते दिखे
  3. दूसरी ओर एक वानर अपनी प्यास बुझाने नल के पास पहुंचा

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। वर्तमान में भीषण गर्मी का दौर जारी है। इन दिनों अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। तीखी तपन से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। ऐसी गर्मी के बीच उज्जैन में दो अलग- अलग रंग देखने को मिले। जहां एक ओर इस भीषण गर्मी में भी यहां एक अघोरी धूनी साधना करते दिखे तो वहीं दूसरी ओर एक वानर अपनी प्यास बुझाने प्याऊ पर पहुंचा और वहां लगे नल से पानी पीया।

तंत्र की ऊर्वरा भूमि और धार्मिक नगरी उज्जैन में इन दिनों अघोरी बाबा अष्टधूनी साधना कर रहे हैं, इसे अग्नि स्नान भी कहा जाता है। 40 डिग्री तापमान की प्रचंड गर्मी में जलते हुए कंडों के बीच बैठकर साधना अत्यंत कठिन है। बताया जाता है इस प्रकार की साधना तांत्रिक सिद्धियों की प्राप्ति के लिए की जाती है। योगी विष्णुनाथ महाराज, योगी सोमवार नाथ महाराज द्वारा की जा रही साधना 19 मई तक चलेगी। 20 मई को भंडारा महाप्रसादी का आयोजन होगा। उल्लेखनीय है कि सिंहस्थ के दौरान यहां आने वाले कई साधू भी इस तरह धूनी रमाते हैं और अग्नि के बीच कठोर तप करते हैं।

इस भीषण गर्मी के दौर में जहां एक ओर सभी हलाकान हो रहे हैं, वहीं क्षेत्र में अघोरी बाबा को धूनी रमाते देख लोग भी हैरान हैं। अघोरी बाबा की कठोर साधना और तपतपाती दोपहर में अग्नि साधना अपने आप में लोगों को आश्चर्य में डाल रहा है। सभी बाबा के तप को देखकर आश्चर्य प्रकट कर रहे हैं।

वहीं दूसरी तस्वीर में एक वानर नल के पास आकर अपना गला तर कर रहा है। मूक पशु-पक्षी भी गर्मी से हलाकान हो रहे हैं। उन्हें अपनी प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। उन्हें जहां आसानी से पानी मिल जाता है, वे वहां पहुंचकर अपने कंठ को गीला कर रहे हैं। यह दृश्य यह भी संदेश दे रहा है कि इन पशु-पक्षियों के लिए भी पानी की व्यवस्था की जाए और उनके लिए गर्मी से बचाव के साधन आसान बनाए जाएं।



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