उज्जैन में अब तक स्वाइन फ्लू के 3 मरीज मिले हैं, एक महिला की मौत हो चुकी है। खाचरौद और लक्ष्मीनगर के दो मरीज भर्ती हैं।

HighLights
- चरक अस्पताल में रोज 200 से ज्यादा बच्चे आ रहे हैं
- 75 बेड का शिशु वार्ड पूरी तरह भर गया
- खाचरौद में 100 घरों में 500 लोगों की स्क्रीनिंग की
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर लोगों के स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगा है। जिले में स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आने के साथ ही सर्दी-खांसी और बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। अब तक जिले में तीन मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें एक महिला की मौत हो चुकी है, जबकि खाचरौद और लक्ष्मीनगर क्षेत्र निवासी दो मरीज अस्पताल में भर्ती हैं।
इधर, चरक अस्पताल में सर्दी-खांसी और बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि 75 बेड का शिशु वार्ड पूरी तरह भर गया। स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए चरक अस्पताल की चौथी मंजिल पर 10 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार किया है। यहां संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए डाक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है। विभाग का दावा है कि आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टाक भी उपलब्ध है।
रोज 200 से ज्यादा बच्चे पहुंच रहे
मौसम बदलने का सबसे ज्यादा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। चरक अस्पताल में प्रतिदिन 200 से अधिक बच्चे उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकांश बच्चे सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित हैं। सामान्य उपचार से ठीक नहीं होने और हालत अधिक खराब होने पर बच्चों को शिशु वार्ड में भर्ती किया जा रहा है।
वार्ड के सभी 75 बेड भर चुके हैं। इसके बावजूद बच्चों को लेकर स्वजन अस्पताल पहुंचते रहे। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार रखी है। सीएमएचओ डॉ. अशोक पटेल ने बताया कि चरक अस्पताल की दूसरी मंजिल पर अतिरिक्त वार्ड उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर बच्चों को वहां शिफ्ट कर उपचार दिया जाएगा।
100 घरों का सर्वे, 500 लोगों की स्क्रीनिंग
स्वाइन फ्लू के मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने खाचरौद में सर्वे और स्क्रीनिंग अभियान शुरू किया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने करीब 100 घरों में पहुंचकर लगभग 500 लोगों की स्क्रीनिंग की। इस दौरान स्वाइन फ्लू के साथ मलेरिया की भी जांच की गई। टीम को आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिन क्षेत्रों में स्वाइन फ्लू के मरीज मिल रहे हैं, वहां लगातार निगरानी रखी जा रही है। टीमों को घर-घर भेजकर लोगों की स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग कराई जा रही है।
लक्षण लंबे समय तक रहें तो कराएं जांच
विशेषज्ञों के अनुसार मौसम बदलने के दौरान सर्दी, खांसी और बुखार होना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें या मरीज की हालत बिगड़ने लगे तो इसे सामान्य मौसमी बीमारी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मरीजों की चिकित्सकीय जांच जरूरी है। समय पर उपचार मिलने पर अधिकांश मरीज करीब सात दिन में स्वस्थ हो जाते हैं। संक्रमित मरीज के संपर्क में आने वाले लोगों को मास्क लगाने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
दवाओं का पर्याप्त स्टाक
सीएमएचओ डॉ. अशोक पटेल ने बताया कि चरक अस्पताल में स्वाइन फ्लू मरीजों के उपचार के लिए 10 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार है। डाक्टर और स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है तथा दवाओं का पर्याप्त स्टाक उपलब्ध है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त वार्ड में भी उपचार की व्यवस्था की जाएगी। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार सर्वे और स्क्रीनिंग कर रही हैं।
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