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उज्जैन में सिंहस्थ से पहले संवरेगा एक और प्राचीन स्थल, 94.47 करोड़ रुपये से विकसित होगा भूखी माता मंदिर


सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन की एक और प्राचीन आस्था स्थली का स्वरूप बदलने जा रहा है। शिप्रा तट स्थित लोकआस्था के केंद्र भूखी माता (भोग माता…और पढ़ें

Publish Date: Sun, 26 Jul 2026 11:17:32 AM (IST)Updated Date: Sun, 26 Jul 2026 11:17:32 AM (IST)

उज्जैन में सिंहस्थ से पहले संवरेगा एक और प्राचीन स्थल, 94.47 करोड़ रुपये से विकसित होगा भूखी माता मंदिर
शिप्रा नदी किनारे स्थित भोग माता मंदिर, जहां पहुंच के लिए मार्ग तो चौड़ा किया ही जा रहा है, साथ ही 12.53 करोड़ रुपये से मंदिर पहुंच के लिए कर्कराज पार्किंग से पुल भी बनाया जा रहा है। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. सिंहस्थ की तैयारियों के बीच उज्जैन की एक और प्राचीन आस्था स्थली का स्वरूप बदलने जा रहा है
  2. शिप्रा तट स्थित भूखी माता मंदिर के समग्र विकास के लिए 94.47 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की गई है
  3. मंदिर परिसर का संरक्षण और सौंदर्यीकरण करने के साथ श्रद्धालुओं के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित की जाएंगी

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन की एक और प्राचीन आस्था स्थली का स्वरूप बदलने जा रहा है। शिप्रा तट स्थित लोकआस्था के केंद्र भूखी माता (भोग माता) मंदिर के समग्र विकास के लिए 94.47 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की गई है।

इस योजना के तहत मंदिर परिसर का संरक्षण और सौंदर्यीकरण करने के साथ भव्य कॉरिडोर, आधुनिक जनसुविधा केंद्र, पार्किंग, घाटों का उन्नयन और श्रद्धालुओं के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना पूरी होने के बाद यह क्षेत्र महाकाल लोक के बाद उज्जैन के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल होगा और सिंहस्थ- 2028 में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए नया आकर्षण बनेगा।

यूडीए द्वारा तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के अनुसार मंदिर परिसर को उसकी प्राचीन धार्मिक पहचान के अनुरूप विकसित किया जाएगा। विकास कार्यों में परंपरागत स्थापत्य शैली और आधुनिक सुविधाओं का संतुलन रखा जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण के साथ बेहतर व्यवस्थाएं भी मिल सकें।

मंदिर तक पहुंचने वाले मार्गों को व्यवस्थित किया जाएगा और श्रद्धालुओं की आवाजाही को आसान बनाने के लिए यातायात प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य केवल मंदिर का सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि क्षिप्रा तट के इस पूरे क्षेत्र को एक व्यवस्थित धार्मिक परिसर के रूप में विकसित करना है। श्रद्धालुओं के लिए विशाल जनसुविधा केंद्र, प्रतीक्षालय, पेयजल, स्वच्छ शौचालय, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं, आकर्षक लैंडस्केपिंग, हाईमास्ट लाइटिंग और सीसीटीवी आधारित सुरक्षा व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे पर्व, त्योहारों और सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

लोकआस्था में ”भूखी माता”, शास्त्रों में ”भोग माता”

उज्जैन में यह मंदिर सदियों से भूखी माता मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। लोककथाओं के अनुसार राजा विक्रमादित्य के समय देवी को प्रसन्न करने के लिए विशेष भोग अर्पित किए जाते थे। बाद में बलि की परंपरा समाप्त होने और महाभोग की परंपरा शुरू होने के कारण देवी को भोग माता अथवा भोगेश्वरी के नाम से भी पूजा जाने लगा। आज भी दोनों नाम समान श्रद्धा के साथ प्रचलित हैं और मंदिर लोकआस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से केवल एक मंदिर का विकास नहीं होगा, बल्कि शिप्रा तट की सांस्कृतिक विरासत को भी नया संरक्षण मिलेगा। इससे उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को महाकाल मंदिर और महाकाल लोक के अलावा शहर की अन्य प्राचीन धार्मिक धरोहरों तक भी सहज पहुंच मिलेगी। स्थानीय व्यापार, प्रसाद विक्रेताओं, नाव संचालकों, हस्तशिल्प व्यवसाय और छोटे कारोबारियों को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।

परियोजना की प्रमुख बातें

  • लागत: 94.47 करोड़ रुपये
  • स्थान: क्षिप्रा तट स्थित भूखी माता (भोग माता) मंदिर परिसर
  • मुख्य कार्य: भव्य कॉरिडोर, जनसुविधा केंद्र, पार्किंग, घाट विकास और सौंदर्यीकरण
  • सुविधाएं: पेयजल, स्वच्छ शौचालय, प्रतीक्षालय, हाईमास्ट लाइटिंग, सीसीटीवी सुरक्षा, हरित क्षेत्र
  • लक्ष्य: सिंहस्थ-2028 से पहले परियोजना पूरी कर श्रद्धालुओं को समर्पित करना।

12 से 18 माह में कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया जाएगा

भोग माता मंदिर परिसर का कायाकल्प सिंहस्थ-2028 की हमारी व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति का अहम हिस्सा है। 94.47 करोड़ रुपये की यह योजना पौराणिक विरासत के संरक्षण के साथ आधुनिक नागरिक सुविधाओं का संतुलन स्थापित करेगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण एजेंसी को 12 से 18 माह में कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया जाएगा। -संदीप सोनी, सीईओ, उज्जैन विकास प्राधिकरण

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