उज्जैन के 52 शक्तिपीठों में शामिल मां हरसिद्धि मंदिर की व्यवस्था बदहाल हो गई है। मंदिर के बाहर कचरे के ढेर लगे हैं, होल्डिंग पॉइंट में गंदगी और दुर्गं…और पढ़ें

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। देश के 52 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर की व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। साफ सफाई नहीं होने से मंदिर के आसपास कूढ़े कचरे के ढेर लगे हुए हैं। मंदिर के बाहर दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए बनाए जा रहे नए होल्डिंग पाइंट में गंदगी के कारण दुर्गंध फैल रही है। मंदिर प्रशासन की अनदेखी के कारण प्रवेश द्वारों के सामने अतिक्रमण पसरा हुआ है, इससे आवागमन बाधित हो रहा है।
करीब तीन माह पहले कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने हरसिद्धि मंदिर का दौरा कर यहां श्रद्धालुओं की सुविधा के इंतजाम करने के निर्देश दिए थे। कलेक्टर ने महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक को हरसिद्धि मंदिर में सुविधा के विस्तार तथा यहां की व्यवस्थाओं को विश्वस्तरीय बनाने का जिम्मा सौंपा था। प्रशासक कौशिक ने हरसिद्धि मंदिर समिति के अधिकारियों के साथ बैठकर कर विकास कार्यों का रोडमैप तैयार कर दिया था, उसी के आधार पर काम भी शुरू हो गया था।
मंदिर के बाहर भिखारियों का जमावड़ा
वर्तमान में मंदिर के बाहर नया होल्डप तथा जूता चप्पल स्टैंड आकार ले रहा है। विकास कार्य तो गति से जारी है, लेकिन आंतरिक व्यवस्था ध्वस्त होती जा रही है। इससे बाहर से आने वाले दर्शनार्थी परेशान हो रहे हैं। मंदिर के आसपास चारों तरफ गंदगी का साम्राज्य है। मंदिर के बाहर भिक्षुकों का जमावड़ा रहता है, देखरेख के अभाव में होल्डप के लिए बनाया गया नया शेड भिखारियों की आश्रय स्थली बन गया है।
यह लोग रात में अंधेरे का लाभ उठाकर यहां शौच इत्यादि कर देते हैं। साफ सफाई के अभाव में गंदगी से दुर्गंध उठती रहती है। मंदिर से निकलने वाला निर्माल्य बाहर दीवार के पास डाल दिया जाता है, बारिश में गीले फूल सड़कर दुर्गंध पैदा करते हैं, इससे आसपास के रहवासी व यात्रियों को खासी परेशानी होती है। मामले में मंदिर के अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
300-400 रुपये में लग रही टेबलें
सूत्र बताते हैं हरसिद्धि मंदिर के बाहर 300 से 400 रुपये किराए में अतिक्रमण कर हार फूल, प्रसादी की टेबलें लगाई जा रही है। दुकानदार ग्राहकों के वाहन भी यहीं पार्क करा लेते हैं। इससे मार्ग अवरुद्ध होता है, दुकानों के आसपास गंदगी भी पसरी रहती है।