धीरज गोमे, नईदुनिया, उज्जैन। धार्मिक-पर्यटन नगरी उज्जैन में मां शिप्रा की आरती का दायरा अब रामघाट से आगे बढ़ने जा रहा है। इंदौर रोड पर 284 करोड़ रुपये से निर्माणाधीन ‘यूनिटी मॉल’ के पीछे विकसित घाट पर भी प्रतिदिन नियमित मां शिप्रा की महाआरती कराने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड (यूएससीएल) ने एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू की है।
योजना के अनुसार यहां रोज शाम वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद, दीप आरती और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मां शिप्रा की भव्य आरती होगी। इससे महाकाल दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को रामघाट के अलावा एक और प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र मिलेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पूरी व्यवस्था सरकारी खर्च पर नहीं, बल्कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) माडल पर संचालित होगी।
चयनित एजेंसी को आरती का संपूर्ण संचालन अपने संसाधनों से करना होगा। इसमें पुजारी, सेवक, आरती सामग्री, साउंड सिस्टम, लाइटिंग, सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था सहित सभी खर्च शामिल रहेंगे। स्मार्ट सिटी इसके लिए अलग से कोई भुगतान नहीं करेगी।
टेंडर दस्तावेज के अनुसार एजेंसी की आय का प्रमुख स्रोत टिकटिंग रहेगा। एजेंसी को आरती स्थल पर विशेष दर्शक दीर्घा या प्राइम व्यूइंग एरिया के लिए टिकट बेचने की अनुमति होगी। हालांकि सामान्य श्रद्धालुओं के लिए गैर-टिकट क्षेत्र में प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रहेगा। इसके अलावा सक्षम प्राधिकरण की अनुमति से कुछ अन्य आय स्रोत भी विकसित किए जा सकेंगे, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि धार्मिक गरिमा और जनहित प्रभावित न हों।
इस मॉडल की खासियत यह है कि एजेंसी केवल आय अर्जित नहीं करेगी, बल्कि उसे हर माह उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड को निर्धारित प्रीमियम भी देना होगा। टेंडर में वित्तीय चयन का आधार यही रखा गया है। जो पात्र एजेंसी सबसे अधिक मासिक प्रीमियम देने की पेशकश करेगी, उसे प्राथमिकता मिलेगी। यानी आरती के माध्यम से धार्मिक गतिविधि के साथ स्मार्ट सिटी को भी नियमित राजस्व प्राप्त होगा। ज्ञात रहे कि अभी रामघाट पर दो स्थानों पर शिप्रा आरती होती है। जहां महाकाल की पालकी श्रावण-भादौ में पूजन के लिए विराजित की जाती है वहां स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सौजन्य से और प्राचीन आरती द्वार पर स्थानीय पंडे-पुजारियों के सौजन्य से।
आरती का स्वरूप शैव परंपरा और धार्मिक महत्ता के अनुरूप होगा
दस्तावेज के अनुसार आरती का स्वरूप उज्जैन की शैव परंपरा और मां शिप्रा की धार्मिक महत्ता के अनुरूप रखा जाएगा। श्रावण मास, महाशिवरात्रि, कार्तिक पूर्णिमा, दीपावली तथा अन्य प्रमुख पर्वों पर विशेष आरती और विस्तारित आयोजन भी किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल होती है तो शिप्रा तट पर रामघाट के बाद दूसरा स्थायी आरती केंद्र विकसित होगा। इससे धार्मिक पर्यटन को नया आयाम मिलेगा और शाम के समय श्रद्धालुओं के लिए एक अतिरिक्त आकर्षण तैयार होगा। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच इसे शहर की पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाली पहल माना जा रहा है।
यहीं स्थापित होगी भगवान श्रीकृष्ण की विराट स्वरूप प्रतिमा
यूनिटी माल के पीछे क्षिप्रा तट पर 220 करोड़ रुपये की योजना से भगवान श्रीकृष्ण की 151 फीट ऊंची धातु निर्मित विराट स्वरूप प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी है। प्रतिमा का डिजाइन स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार पद्मभूषण राम वनजी सुतार के परिवार द्वारा तैयार किया जा रहा है। 30 एकड़ क्षेत्र में लाइट एंड साउंड शो, प्रोजेक्शन मैपिंग, उद्यान और पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
साल अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा यूनिटी मॉल
284 करोड़ रुपये की लागत से इंदौर रोड स्थित हरिफाटक ब्रिज के समीप 3.2 हेक्टेयर क्षेत्र में यूनिटी माल साल अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा। इसे सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन के बड़े व्यापारिक और पर्यटन केंद्र के रूप में तैयार किया जा रहा है। परियोजना में 142 दुकानें, मल्टीप्लेक्स, कन्वेंशन सेंटर, फूड कोर्ट, किड्स जोन, 53 गेस्ट रूम, विशाल पार्किंग और जीआई टैग उत्पादों का बाजार विकसित होगा। फिलहाल 75 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 25 प्रतिशत कार्य शेष है। समय-सीमा तीसरी बार बढ़ाकर अक्टूबर-2026 तय की गई है। प्रबुद्धजनों का कहना है कि यूनिटी माल, श्रीकृष्ण प्रतिमा और प्रस्तावित शिप्रा आरती मिलकर इस पूरे क्षेत्र को उज्जैन का नया स्पिरिचुअल टूरिज्म हब बना सकते हैं।

