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उज्जैन में माता महामाया को कलेक्टर लगाएंगे मदिरा का भोग, सम्राट विक्रमादित्य के काल से चल रही परंपरा


कलेक्टर रोशन कुमार सिंह सुबह 8 बजे चौबीस खंबा माता मंदिर में साधु संतों की मौजूदगी में माता महामाया व महालया को मदिरा का भोग लगाकर नगर पूजा की शुरुआत …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 25 Mar 2026 09:34:59 PM (IST)Updated Date: Wed, 25 Mar 2026 09:34:59 PM (IST)

माता महामाया को मदिरा की धार चढ़ाएंगे कलेक्टर।

HighLights

  1. महामाया को मदिरा की धार चढ़ाएंगे कलेक्टर।
  2. उज्जैन में मदिरा की धार से नगर पूजा।
  3. 40 से अधिक मंदिरों में होगी अर्चना।

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी पर गुरुवार को नगर की सुख समृद्धि के लिए मदिरा की धार से पूजा की जाएगी। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह सुबह 8 बजे चौबीस खंबा माता मंदिर में साधु संतों की मौजूदगी में माता महामाया व महालया को मदिरा का भोग लगाकर नगर पूजा की शुरुआत करेंगे।

इसके बाद शासकीय अधिकारी व कोटवारों का दल 40 से अधिक देवी-भैरव मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए रवाना होगा। 27 किलोमीटर लंबे पूजा मार्ग पर करीब 25 बोतल मदिरा की धार लगाई जाएगी।

सम्राट विक्रमादित्य के काल से चली आ रही परंपरा

सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल से चली आ रही इस परंपरा का निर्वहन राजा महाराजा भी करते रहे हैं। कुछ सालों पहले निरंजनी अखाड़े के महंत रविंद्रपुरी महाराज ने चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी पर नगर पूजा की शुरुआत की। इस बार भी उन्हीं के द्वारा पूजा का प्रबंध किया गया है।

पूजा में शामिल होने के लिए महंत रविंद्रपुरी महाराज बुधवार को उज्जैन पहुंच गए हैं। चौबीस खंभा स्थित माता महामाया व महालया को मदिरा का भोग लगेगा। नगर के चालीस से अधिक देवी व भैरव मंदिर में पूजा अर्चना की जाएगी।

महाकाल सेना ने परंपरा समाप्त करने का प्रयास बताया

महाकाल सेना ने नगर पूजा की शुरुआत को पुरातन परंपरा समाप्त करने वाला बताया है। संगठन के महेंद्र सिंह बैस ने कहा कि उज्जैन में नगर पूजा की परंपरा विक्रमकालीन है, जो शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर की जाती रही है। चैत्र नवरात्र में इसकी शुरुआत अनुचित है।



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