अब उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने 22 जुलाई को 96.26 करोड़ रुपये की नई विकास परियोजना के लिए निर्माण एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू की है। नई योजना का उद्देश्य मंदिर परिसर का विस्तार कर श्रद्धालु सुविधाएं, सुरक्षा, आधारभूत ढांचा और धार्मिक पर्यटन को नई मजबूती देना है। यदि कार्य तय समय में पूरा होता है तो सिंहस्थ-2028 से पहले महाकाल महालोक के बाद उज्जैन को एक और विकसित धार्मिक परिसर मिल सकता है।
पूरे परिसर को व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाया जाएगा
इंदौर रोड स्थित शिप्रा तट का नवग्रह शनि मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। प्रत्येक शनिवार और शनैश्चरी अमावस्या पर यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। बढ़ती भीड़ के कारण दर्शन व्यवस्था, आवागमन और पार्किंग जैसी व्यवस्थाओं पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। नई परियोजना में इन्हीं चुनौतियों का समाधान करते हुए पूरे परिसर को अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाया जाएगा।
योजना के तहत मंदिर परिसर में नए निर्माण कार्यों के साथ श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएंगी। भीड़ नियंत्रण के लिए व्यवस्थित प्रवेश-निकास मार्ग, सुरक्षा निगरानी, आपातकालीन वाहन पहुंच और बेहतर जल निकासी जैसी व्यवस्थाओं को भी शामिल किया गया है।
इसका उद्देश्य बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम व्यवस्था उपलब्ध कराना है। यह परियोजना धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम मानी जा रही है। निर्माण कार्य से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जबकि परियोजना पूरी होने के बाद होटल, धर्मशालाएं, परिवहन, प्रसाद, फूल, पूजा सामग्री और स्थानीय व्यापार को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। महाकाल महालोक के बाद शहर में बढ़े धार्मिक पर्यटन को देखते हुए प्रशासन चाहता है कि श्रद्धालु शनि मंदिर सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों तक भी पहुंचें।
किस योजना में क्या होगा
यूएससीएल की 71.76 करोड़ रुपये की योजना : शनि लोक के रूप में भव्य मंदिर परिसर, घाट सौंदर्यीकरण, कतार प्रबंधन, स्मार्ट लाइटिंग, सीसीटीवी, लैंडस्केपिंग, पैदल पथ और एसटीपी जैसी सुविधाएं प्रस्तावित थीं।
यूडीए की 96.26 करोड़ रुपये की योजना : पूरे परिसर का विस्तार, भवन निर्माण, श्रद्धालु सुविधाएं, आधारभूत ढांचा, सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और आधुनिक मंदिर विकास कार्य किए जाएंगे।
वो सबकुछ जो आप जानना चाहते
राज्य सरकार ने सात जनवरी 2026 को इस परियोजना को मंजूरी देते हुए कुल 140 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। यह परियोजना इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी शनि मंदिर परिसर के लगभग 21,100 वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित की जाएगी। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना सम्राट विक्रमादित्य ने की थी और यहीं से विक्रम संवत का उद्गम माना जाता है। परियोजना के अनुसार ‘शनि लोक’ को पारंपरिक धार्मिक आस्था और आधुनिक इंजीनियरिंग का अनूठा मिश्रण बनाया जाएगा।
परियोजना में बेसाल्ट और बंसी पहाड़पुर के पत्थरों से मोनोलिथिक मंदिर संरचना तैयार की जाएगी, जिसमें नवग्रहों की महिमा को दर्शाती नक्काशीदार कलाकृतियां प्रमुख आकर्षण होंगी। परिसर में थ्रीडी पत्थर जालियां, भव्य प्रवेश द्वार, धार्मिक मूर्तियां और सांस्कृतिक प्रांगण विकसित किए जाएंगे।
71.76 कराेड़ रुपये की परियोजना के लिए निविदा खोलने की तारीख 17 अप्रैल 2026 थीं, मगर अब तक ठेकेदार चयन की कार्रवाई पूरी नहीं हो पाई है। इधर, 96.26 करोड़ की परियोजना के लिए निविदा खोलने की तारीख 14 अगस्त तय की है।

