महाकाल क्षेत्र और सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने 645 करोड़ रुपये का टर्म लोन बैंक से लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी …और पढ़ें

HighLights
- उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने 645 करोड़ रुपये का टर्म लोन बैंक से लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है
- टेंडर में कर्ज की ईएमआई और ब्याज का स्रोत क्या होगा इसका जवाब नहीं
- ऐसे में करोड़ों रुपये के इस वित्तीय निर्णय पर पारदर्शिता का सवाल भी खड़ा हो गया है
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। महाकाल क्षेत्र और सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने 645 करोड़ रुपये का टर्म लोन बैंक से लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन इस पूरी कवायद के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस 645 करोड़ रुपये के कर्ज की अदायगी किस मद से होगी।
टेंडर दस्तावेज में ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तो विस्तार से है, लेकिन उसकी ईएमआई, ब्याज और मूलधन चुकाने के लिए प्रस्तावित राजस्व स्रोत का कहीं उल्लेख नहीं है। ऐसे में करोड़ों रुपये के इस वित्तीय निर्णय पर पारदर्शिता का सवाल भी खड़ा हो गया है।
यूडीए द्वारा जारी दस्तावेज के अनुसार बैंक केवल टर्म लोन उपलब्ध कराने के लिए अपनी वित्तीय बोली देंगे। इसमें ब्याज दर, वित्तीय शर्तें और बैंक चयन की प्रक्रिया शामिल है। हालांकि दस्तावेज में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ऋण की वापसी भूखंडों की बिक्री से होगी, विकास शुल्क से, परियोजना से होने वाली आय से, राज्य सरकार की सहायता से या किसी अन्य राजस्व स्रोत से।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े टर्म लोन के साथ उसकी पुनर्भुगतान (रिपेमेंट) योजना, अनुमानित नकदी प्रवाह और राजस्व स्रोत का स्पष्ट रोडमैप होना वित्तीय अनुशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। विशेष रूप से तब, जब राशि 645 करोड़ रुपये जैसी बड़ी हो और उस पर वर्षों तक ब्याज भी चुकाना पड़े।
यह भी स्पष्ट नहीं है कि यूडीए इस ऋण के लिए अपनी किसी संपत्ति, विकसित होने वाले भूखंडों या विकास शुल्क को एस्क्रो करेगा या नहीं। टेंडर में राज्य सरकार की गारंटी, पुनर्भुगतान सुरक्षा अथवा किसी विशेष वित्तीय व्यवस्था का भी कोई उल्लेख नहीं है। इसी तरह ऋण की अवधि, संभावित ईएमआई और कुल ब्याज देनदारी जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी सार्वजनिक दस्तावेज का हिस्सा नहीं हैं।
वित्तीय प्रबंधन की अस्पष्ट तस्वीर सामने
महाकाल क्षेत्र के विकास और सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को गति देने के लिए यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन वित्तीय प्रबंधन की स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आने से कई सवाल अनुत्तरित हैं। यदि ऋण का भुगतान भविष्य में भूखंड बिक्री पर निर्भर है तो बाजार की स्थिति इसका जोखिम बढ़ा सकती है। यदि विकास शुल्क से अदायगी प्रस्तावित है तो इससे भविष्य की परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है। वहीं यदि राज्य सरकार अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय सहायता देने वाली है तो उसका स्वरूप भी स्पष्ट होना चाहिए।
इन सवालों के जवाब जरूरी
- 645 करोड़ रुपये के ऋण की अदायगी किस राजस्व स्रोत से होगी।
- ऋण की ईएमआई और ब्याज का भुगतान कौन करेगा।
- क्या राज्य सरकार इस ऋण की गारंटी दे रही है या भविष्य में वित्तीय सहायता देगी।
- ऋण की अवधि कितनी होगी और कुल ब्याज देनदारी कितनी बैठेगी।
- क्या यूडीए ने इस ऋण के लिए कोई विस्तृत वित्तीय पुनर्भुगतान योजना तैयार की है।
( नोट : इन सवालों के जवाब सामने आने तक 645 करोड़ रुपये का यह प्रस्ताव केवल विकास परियोजना ही नहीं, बल्कि वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी भी बन गया है।)
कर्ज लेकर होगा विकास: उज्जैन में महाकाल क्षेत्र के लिए 645 करोड़ रुपये का लोन लेने जा रहा यूडीए