उज्जैन में इस बार मानसून मेहरबान है। गुरुवार शाम हुई तेज बारिश से शहरवासियों को गर्मी-उमस से राहत मिली और शिप्रा नदी का जलस्तर बढ़ गया।

HighLights
- जीवाजी वेधशाला के अनुसार अब तक 295 मिमी बारिश हो चुकी है
- यह पूरे सीजन की औसत 906 मिमी का 30% से ज्यादा है
- अच्छी बारिश से कालियादेह पैलेस के पास 52 कुंड का नजारा निखर गया है
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। वर्षाकाल में मेघ इस बार उज्जैन शहर पर मेहरबान नजर आ रहा है। गुरुवार शाम हुई जोरदार बरसात ने एक ओर जहां शहरवासियों को उमस और गर्मी से राहत दी, वहीं शिप्रा नदी का जलस्तर भी बढ़ गया। अच्छी बरसात से कालियादेह पैलेस के समीप स्थित प्रसिद्ध 52 कुंड का मनोहारी प्राकृतिक दृश्य भी जीवंत हो उठा।
हरियाली और बहते पानी के बीच कालियादेह का प्राकृतिक सौंदर्य ऐसा निखरा कि यह स्थान एक बार फिर प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों की पहली पसंद बन गया। बरसात के बाद 52 कुंड में बहते पानी की धाराएं और शिप्रा का बढ़ा प्रवाह लोगों को आकर्षित करता रहा।
मालूम हो कि वर्षाकाल के दौरान कालियादेह पैलेस का यह क्षेत्र शहर की सबसे सुंदर आउटिंग लोकेशनों में शामिल हो जाता है। यहां प्राचीन स्थापत्य, नदी और हरियाली का अनूठा संगम देखने को मिलता है। कई लोग शाम को यहां पहुंचकर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते नजर आए।
जीवाजी वेधशाला के अनुसार इस सीजन में अब तक उज्जैन शहर में 295 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की जा चुकी है। यह पूरे सीजन की औसत 906 मिलीमीटर वर्षा का 30 प्रतिशत से अधिक है। यानी वर्षाकाल के शुरुआती एक महीने में ही बारिश ने अपने कोटे का लगभग एक-तिहाई हिस्सा पूरा कर लिया है। लगातार बारिश का असर मौसम पर भी दिखाई दिया है।
तापमान में भी गिरावट
बीते 24 घंटे में दिन का अधिकतम तापमान 34.5 डिग्री सेल्सियस से घटकर 31.7 डिग्री और रात का न्यूनतम तापमान 24.5 डिग्री से लुढ़ककर 23 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है और वातावरण में ठंडक घुल गई है। पूरे जिले की बात करें तो इस सीजन में अब तक 116 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में हुई 137 मिलीमीटर वर्षा से कम है।
हालांकि मौसम विभाग को आने वाले दिनों में अच्छी बारिश की उम्मीद है। मानसून की सक्रियता से किसानों के चेहरे भी खिले हुए हैं। खेतों में नमी बढ़ने से खरीफ फसलों को फायदा मिलने की संभावना बढ़ी है। यदि आगामी दिनों में भी इसी तरह संतुलित बारिश होती रही तो जल स्रोतों के साथ कृषि क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
खुली जल निकासी व्यवस्था की पोल
जोरदार बरसात से शहर के कई हिस्सों में सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं। कई स्थानों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ और वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ी। गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया। कई जगह वाहनों के पहिये सड़कों में धंस जाने से जान-माल का खतरा बढ़ा। मानसून की शुरुआत में ही जल निकासी व्यवस्था की कमियां सामने आने से नालों की सफाई और स्थायी ड्रेनेज सिस्टम की जरूरत फिर महसूस होने लगी है।