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उज्जैन बनेगा पहला ‘ग्रीन कुंभ’ मॉडल, हरियाली की छांव में होगा सिंहस्थ, 114 किमी हरित कॉरिडोर होगा तैयार


पहली बार उज्जैन में 2028 में होने वाला सिंहस्थ कुंभ पर्यावरण की प्राथमिकताओं के साथ होगा। ग्रीन कुंभ में 10 लाख पौधों से हरित कॉरिडोर तैयार किया जाएगा…और पढ़ें

Publish Date: Mon, 06 Jul 2026 08:43:10 PM (IST)Updated Date: Mon, 06 Jul 2026 08:43:10 PM (IST)

उज्जैन बनेगा पहला 'ग्रीन कुंभ' मॉडल, हरियाली की छांव में होगा सिंहस्थ, 114 किमी हरित कॉरिडोर होगा तैयार
उज्जैन बनेगा पहला ‘ग्रीन कुंभ’ मॉडल (Simhastha Official Website)

HighLights

  1. उज्जैन सिंहस्थ 2028 में बनेगा ‘ग्रीन कुंभ’, पर्यावरण संरक्षण पर जोर
  2. 114 किमी लंबी सड़कों को 10 लाख पौधे लगाकर बदलेंगे हरित कॉरिडोर में
  3. 3 लाख से ज्यादा गड्ढों की खुदाई पूरी, पौधों की होगी जियो-टैगिंग

धीरज गोमे, नईदुनिया, उज्जैन। पहली बार उज्जैन में 2028 में होने वाला सिंहस्थ कुंभ पर्यावरण की प्राथमिकताओं के साथ होगा। ग्रीन कुंभ में 10 लाख पौधों से हरित कॉरिडोर तैयार किया जाएगा। ग्रीन कुंभ की शुरुआत हो चुकी है। तीन लाख से अधिक गड्ढों की खुदाई पूरी कर ली गई है।

योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सिंहस्थ क्षेत्र की 114 किलोमीटर लंबी सड़कों को हरित कॉरिडोर में बदलना है। इन मार्गों के दोनों ओर 84 हजार बड़े और छायादार पौधे लगाए जाएंगे।

नीम, करंज और जामुन के 10 से 12 फीट ऊंचे पौधे श्रद्धालुओं को देंगे प्राकृतिक छाया

इनमें मुख्य रूप से नीम, करंज, जामुन और अन्य छायादार प्रजातियों के 10 से 12 फीट ऊंचे पौधे लगाए जाएंगे। इन प्रजातियों का चयन इसलिए किया गया है कि ये कम समय में अच्छी वृद्धि कर सकें और सिंहस्थ-2028 तक श्रद्धालुओं को प्राकृतिक छाया उपलब्ध करा सकें। बढ़ते तापमान और हीटवेव को देखते हुए यह चयन केवल सुंदरीकरण के लिए नहीं, बल्कि जलवायु अनुकूल अधोसंरचना विकसित करने की रणनीति का हिस्सा है।

प्रशासन निर्माणाधीन 29 किलोमीटर लंबे घाटों और मार्गों के किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण करेगा। इसके अलावा शहर के 400 से अधिक उद्यान, प्रमुख जलाशयों के किनारे, शासकीय परिसरों और संस्थागत क्षेत्रों को भी इस हरित अभियान से जोड़ा गया है।

पौधों की होगी जियो-टैगिंग, सनातन परंपरा और प्रकृति संरक्षण का सामूहिक संकल्प

पौधों की जियो-टैगिंग की जाएगी, ताकि संरक्षण और जीवित रहने की भी लगातार निगरानी की जा सके। सनातन परंपरा में पीपल, बरगद, नीम और बेल जैसे पेड़ों को देवतुल्य माना गया है। पुराणों में पौधारोपण को यज्ञ और पुण्य का कार्य बताया गया है।



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